पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का कहना है कि राज्य गठन के 14 साल बाद भी शहीदों के सपनों और उम्मीदों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है। प्रदेश की अपनी कार्य संस्कृति न होकर उत्तर प्रदेश का मॉडल लागू हो गया है।
हर तरफ प्रदेश को लूटने की होड़ मची है। संवेदनाएं खत्म हो गई हैं। ‘मैं और मेरा परिवार’ के विकास की भावना ने सभी आशाएं धूमिल कर दी हैं। भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
मैं भी सीएम रहा, लेकिन जिस कार्य संस्कृति को लागू करना चाहता था नहीं कर पाया। जब तक किसी भी एक पार्टी को 45 से 50 सीटें नहीं मिलती तब तक यह लूट खसोट मची रहेगी। सरकारों के बचाने के चक्कर में प्रदेश की जनता पिसी जा रही है।
भाजपा कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने अल्मोड़ा जाते समय नैनीताल में पाषाण देवी मंदिर में पूजा अर्चना के लिए यहां आए खंडूरी ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि पर्यटन, प्राकृतिक संपदा से संपन्न होने के बावजूद प्रदेश कर्ज में डूबा है।
उन्होंने कहा कि सीएम रहते जो कानून उन्होंने बनाया, कांग्रेस सरकार ने वह कानून ही बदलकर रख दिया। कानून को रहने देते तो पहाड़ों में न डॉक्टरों की कमी होती और न शिक्षकों की।
गोद नहीं लिया गांव, आड़े आया धर्मसंकट
पौड़ी सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी अभी तक गांव गोद नहीं ले पाए हैं। पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों को कवर करता है। इसमें दोनों ही मंडलों के मतदाता मतदान करते हैं।
पौड़ी के अलावा कुमाऊं का रामनगर क्षेत्र उन्हीं के संसदीय क्षेत्र में आता है। अभी उन्होंने किसी गांव को गोद नहीं लिया है। दो मंडलों के बीच फंसे संसदीय क्षेत्र के कारण गांव गोद लेने में अभी उनके सामने धर्मसंकट बना है कि कहां के गांव को गोद लिया जाए।
अल्मोड़ा में भाजपा कार्यसमिति में भागीदारी करने से पूर्व नैनीताल आए सांसद खंडूरी से गांव गोद लिए जाने बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी 10 नवंबर तक गांव गोद लेने के लिए उनके पास समय है।
गांव गोद लेने के लिए यह होगा पैमाना
उन्होंने कहा कि अभी कुमाऊं के रामनगर और पौड़ी जिले के सभी गांवों का अध्ययन करना है। किस क्षेत्र में सबसे अधिक पिछड़ा गांव है, यह भी तय करना है।
जो गांव विकास से सबसे पिछड़ा होगा और पानी, बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल, रोजगार समेत तमाम मूलभूत आवश्यकताओं की जरूरत महसूस की जाएगी, उसी गांव को गोद लिया जाएगा। इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। जल्द ही वह इसका निर्णय ले लेंगे।
पत्रकार ज्यादा, कार्यकर्ता कम
पाषाण देवी मंदिर में पूजा अर्चना करने आए पूर्व सीएम खंडूरी के पहुंचने से पूर्व वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं में से एक ने पत्रकारों के पास आकर कहा कि यहां खंडूरी जी की अगवानी में कार्यकर्ताओं से ज्यादा तो पत्रकार दिखाई दे रहे हैं। इतना कहकर वह कार्यकर्ताओं की जमात में चले गए।