शासन को अनुमति देने में 40 से अधिक दिन लगे। इस दौरान शासन ने जांच अधिकारी से प्रकरण से संबंधित केस डायरी व अन्य ब्योरा मांगा। इसके बाद न्याय विभाग से सलाह ली। न्याय विभाग से सहमति मिलने के बाद शासन ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी।
जांच अधिकारी को मुकदमा चलाने की अनुमति में देरी का मसला हाईकोर्ट के सामने भी आया था। गत 16 दिसंबर को छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विभागीय सचिव को अगली सुनवाई पर इस संबंध में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद शासन स्तर पर तत्कालीन विभागीय अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया में तेजी आई और अब मंजूरी जारी की गई।