मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में लौटने के लिए 2.62 लाख उत्तराखंड के प्रवासियों ने पंजीकरण करवाया था, जिसमें से 1.81 लाख लोग आ चुके हैं। सर्वाधिक दिल्ली से 66 हजार, यूपी से 28 हजार, हरियाणा से 25 हजार, महाराष्ट्र से 13 हजार, पंजाब और चंडीगढ़ से 10 हजार, राजस्थान से नौ हजार से अधिक, गुजरात से आठ हजार और कर्नाटक से छह हजार सहित अन्य राज्यों से 4500 के करीब प्रवासी आए हैं। उन्होंने कहा कि अब शेष पंजीकृत लोगों में से अधिकांश आना नहीं चाह रहे।
28 मई को 98 हजार लोगों को एसएमएस किया था, जिसमें तीन हजार ने आने की इच्छा जताई है। उन्हें लाया जाएगा। इसके अलावा जयपुर, मंगलौर, गोवा, नासिक और केरला से ट्रेन उत्तराखंड के लिए चलाई जा सकती है।
बशर्ते आने वालों की पर्याप्त संख्या मिले। सरकार हर हालत में फंसे लोगों को किसी न किसी माध्यम से लेकर आएगी। बताया कि राज्य से जाने वालों की संख्या 64 हजार है। इसमें सर्वाधिक यूपी के 27500, बिहारी के 18500, दिल्ली के 56 सौ सहित अन्य कुछ राज्यों के प्रवासी भी हैं।