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Lockdown: 300 किमी. पैदल चलकर टनकपुर पहुंचे मजदूरों ने बयां किया दर्द, बोले- रोजी-रोटी छिन गई, कैसे कटेगी जिंदगी

Wed, 01 Apr 2020 02:10 AM IST
अलका त्यागी राजेश देउपा , अमर उजाला, टनकपुर(चंपावत)

सार

  • धारचूला से 300 किमी. पैदल चल टनकपुर पहुंचे बहराइच के मजदूरों ने बयां किया दर्द
  • रास्ते में खाने को कुछ नहीं मिला, नमकीन बिस्कुट व पानी पीकर शांत की पेट की आग
  • पुल खुलने की अफवाह से 209 नेपाली झूलाघाट पहुंचे
  • डीएम ने धारचूला पहुंच शिविरों में रहे रहे नेपालियों का हाल जाना
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टनकपुर पहुंचे मजदूर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साहब कोरोना ने हमरी तो रोजी-रोटी छिन लई। घर जान को पैदल निकले तो हमका रास्ता में ही फंसा दई। खान-पीन की कोई बात नहीं साहब, लेकिन हम तो घर के रहे न घाट के। ये दर्द था धारचूला से करीब 300 किलोमीटर पैदल चलकर जैसे-तैसे टनकपुर पहुंचे ग्राम दौलतपुर बहराइच निवासी मजदूर ओमकार और उसके चार साथियों का।

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जीजीआईसी भवन में ऐहतियातन क्वारंटीन किए गए करीब ढाई सौ से ज्यादा यात्रियों संग अपने पांच साथियों के साथ रह रहे ओमकार सेे जब बात हुई तो कोरोना संक्रमण के खौफ से ज्यादा पैदा हुए हालात को लेकर उसका दर्द छलका।

ओमकार ने बताया कि वह रोजी-रोटी की तलाश में अपने पांच साथियों के साथ मजूदरी करने एक माह पूर्व धारचूला पहुंचा था।  वह और उसके साथी राममिलन, अन्नू लाल, पंकज कुमार और राममूरत भवन निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे लेकिन कोरोना के कारण उनका काम छिन गया।

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बिस्कुट और पानी पीकर भूख मिटाई

घर लौटने को साधन नहीं मिला तो वे पैदल ही चल पड़े। रास्ते में हाथ-पैर जोड़ने पर कुछ चालकों ने उन्हें लिफ्ट देकर थोड़ी-थोड़ी दूरी तक राहत पहुंचाई लेकिन ज्यादातर सफर पैदल ही तय करना पड़ा। रास्ते में कहीं खाना नहीं मिला। कुछ दुकानें खुली मिली तो नमकीन, बिस्कुट और पानी पीकर भूख मिटाई।

उम्मीद थी कि पिथौरागढ़ से कोई बस मिल जाएगी लेकिन वह भी नहीं मिली। बस मिलने की उम्मीद में वे जैसे-तैसे पैदल चलकर टनकपुर तक पहुंचे तो यहां पुलिस ने उन्हें यहां रोक लिया। ओमकार का कहना है कि यहां रहने खाने की व्यवस्था सब ठीक है, लेकिन घर में परिवार परेशान हो रहा है।

डीएम ने धारचूला पहुंच शिविरों में रहे रहे नेपालियों का हाल जाना

लॉकडाउन के चलते भारत-नेपाल सीमा पर झूलापुल के गेट नहीं खुलने से धारचूला के साथ ही बलुवाकोट में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों का जमावड़ा लग गया है। डीएम डॉ. विजय कुमार ने मंगलवार को धारचूला पहुंचकर यहां नेपालियों के लिए बनाए गए शिविरों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सभी लोगों के लिए ठहरने और भोजन की उचित व्यवस्था करने के एसडीएम एके शुक्ला को निर्देश दिए।

डीएम ने राइंका जौलजीबी, बलुवाकोट, फायर स्टेशन निंगालपानी, स्टेडियम धारचूला तथा काजी हाउस में रह रहे करीब 850 नेपाली नागरिकों एवं मजदूरों को भोजन वितरण के साथ ही उनका हालचाल जाना। उन्होंने सभी से सामाजिक दूरी बनाए रखने को कहा। उन्होंने धारचूला में काली नदी किनारे बने काजी हाउस में रुके 165 मजदूरों को शिफ्ट करने के निर्देश दिए।

बाद में काजी हाउस में बनाए राहत शिविर को मौके पर ही राबाइंका में शिफ्ट कराया। इस दौारन नेपाली मजदूरों से बातचीत भी की। डीएम ने नेपाली नागरिकों से कहा कि उन्हें लॉकडाउन की अवधि तक आवागमन नहीं करना है। दोनों देशों की सीमाएं भी बंद हैं। यहां किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। वहां मौजूद एसपी प्रीति प्रियदर्शनी ने सभी से लॉकडाउन का अनुपालन करने की अपील करते हुए सीओ धारचूला को काली नदी के किनारे गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। इस दौरान सीओ विमल आचार्य, तहसीलदार नंदन राम, नायब तहसीलदार मनीषा बिष्ट, ईओ पालिका पीएस बोहरा, थाना प्रभारी विजेंद्र साह भी मौजूद रहे।
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पुल खुलने की अफवाह से 209 नेपाली झूलाघाट पहुंचे

सोमवार देर रात पिथौरागढ़ के अलग अलग जगहों से 209 नेपाली नागरिक झूलाघाट पहुंच गए। नेपालियों ने बताया उन्हें कुछ लोगों ने झूलाघाट पुल खुलने की जानकारी दी थी। लॉकडाउन के चलते पिथौरागढ़ जिले के कस्बों और गांवों में दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले नेपाली रोजगार न मिलने से अपने वतन लौटना चाह रहे हैं। 14 अप्रैल को नेपाल का प्रमुख संक्राति का त्योहार होने से वह अपने घर जाना चाहते हैं।

हालांकि यहां पर नेपाली नागरिकों के लिए प्रशासन और कार्ड संस्था की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई। थाना प्रभारी महेश चंद्र, राजस्व उपनिरिक्षक गोपाल डीनिया, कार्ड संस्था के सचिव सुरेंद्र आर्या सहयोग कर रहे हैं। 
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