इसका मुख्य कारण चीन की ओर से कीमतों में वृद्धि और बदली परिस्थितियों में लदान और ढुलाई महंगा होना भी है। उद्यमियों के सामने परेशानी यह है कि इस समय देश में इन दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है और एपीआई बेहद कम।
दवाओं में इस्तेमाल होने वाला अधिकतर माल चीन से ही आता है, लिहाजा उद्यमियों को महंगी कीमत पर भी सामान खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च तक हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन नामक साल्ट 7800 रुपये प्रति किलो था, जो इस समय 55 हजार रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है।
एजिथ्रोमाइसीन 6500 रुपये से बढ़कर करीब 15 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इवेर मेक्टिन 1400 रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये किलो तक पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में जरूरी दवाएं बेहद महंगी हो रही हैं। उद्यमियों ने सरकार से स्थानीय स्तर पर कीमतों पर नियंत्रण करने के साथ-साथ कच्चे माल की उपलब्धता भी कराने की मांग की है।