जब वे गौचर (चमोली) पहुंचे तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संतोष और उसकी पत्नी को क्वारंटीरन कर दिया। वह सिस्टम से गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। संतोष ने अमर उजाला से मदद मांगी।
अमर उजाला ने चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया, पुलिस कप्तान यशवंत सिंह को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी तो सिस्टम हरकत में आया। आखिर में गेस्ट हाउस में बंद संतोष को गांव जाने की इजाजत दी गई।
संतोष ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उसके गांव पहुंचने से पहले उसकी मां की चिता को उसके बड़े भाई राजन प्रसाद पुरोहित ने मुखाग्नि दे दी थी। संतोष का कहना है कि मां को आखिरी बार न देख पाने का मलाल जिंदगी भर रहेगा।