वेंटिलेटर सांस नली के विस्तृत प्रकार के अवरोधों में उपयोगी होगा और सभी आयु वर्ग के रोगियों, विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए खास लाभदायक है। प्रोटोटाइप का परीक्षण सामान्य और सांस के विशिष्ट रोगियों पर सफलतापूर्वक किया गया है। इसे काम करने के लिए कंप्रेस्ड हवा की जरूरत नहीं पड़ती है।
ऐसे में यह अस्पताल के किसी वार्ड या खुले क्षेत्र में परिवर्तित आईसीयू में मददगार होगा। यह रीयल-टाइम स्पायरोमेट्री और अलार्म से उच्च दबाव को सीमित कर सकता है। इसमें रिमोट मॉनिटरिंग, ऑपरेटिंग मीटर, टच स्क्रीन से नियंत्रण, सांस लेने के लिए नमी और तापमान नियंत्रण की भी खूबियां हैं।
इसकी लागत 25 हजार रुपये आंकी गई है जबकि बाजार में वेंटिलेटर की कीमत कई लाख में है। आईआईटी के निदेशक प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने आईआईटी वैज्ञानिकों के इस प्रयास की सराहना की है।
वेंटिलेटर को आईआईटी ने अपने स्तर पर सफलतापूर्वक टेस्ट कर लिया है। साथ ही बृहस्पतिवार को कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज वेबिनार पर ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आईआईटी दिल्ली, आईआईटी चेन्नई समेत 400 से अधिक औद्योगिक कंपनियों के अधिकारियों ने प्रजेंटेशन देखा।
साथ ही इसके निर्माण की इच्छा जताई है। प्रो. अक्षय द्विवेदी ने बताया कि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के बाद इसका निर्माण शुरू हो सकता है। प्रक्रिया में तेजी आती है तो महामारी के संकट में इसका उपयोग शुरू हो जाएगा।