प्रदेश में बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की निजी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में आयोग ने बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए तैयारी के निर्देश दिए। आयोग की ओर से कहा गया कि परिवार के सदस्यों की वजह से बच्चे संक्रमित होते हैं। उन्हें इससे बचाने के लिए पहले अभिभावकों को वैक्सीन लगाई जाए।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने कहा कि वर्तमान में 18 वर्ष आयु वर्ग से ऊपर के व्यक्तियों को वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन वैक्सीन की कमी के चलते वैक्सीनेशन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल्द ही साढ़े चार लाख वैक्सीन आने वाली है। बैठक में आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि प्रदेश में बच्चे कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। जल्द ही उनके लिए कोविड केयर सेंटर और चाइल्ड केयर वार्ड बनाए जाएं। इसके अलावा हल्द्वानी और ऋषिकेश में डीआरडीओ द्वारा बनाए जाने वाले अस्पतालों में लगभग 100-100 बैड का वार्ड बनाकर उनमें वेंटीलेटर लगाए जाएं।
इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी चाइल्ड वार्ड, आईसीयू और ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। बैठक में निजी अस्पतालों की ओर से बताया गया कि सरकार यदि निजी अस्पतालों को वैक्सीन उपलब्ध कराए तो तय दरों पर अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लग सकती है। पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य स्तर पर टास्क फोर्स के अलावा हर जिले में टास्क फोर्स बनाई जाए जिसमें जिले अपने संसाधनों के बारे में खुद जानकारी उपलब्ध करा सकें।
बैठक में यह भी कहा गया कि दस वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए वेंटीलेटर का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नहीं है। बैठक में यह भी कहा गया कि जिला अस्पतालों में दो से तीन सौ वेंटीलेटर उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में डॉ. एसएस बिष्ट, डॉ. सुनील कुमार झा, डॉ. संजय दास, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. विकास, सबरवाल आदि मौजूद रहे।