कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन में ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सबसे बुरी चोट पहुंची है। हजारों परिवहन संचालकों और सवा लाख चालक-परिचालकों की रोजी-रोटी से जुड़े ट्रांसपोर्ट कारोबार की उखड़ती सांसों को मदद की दरकार है। अभी तक इस सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें यदि रोडवेज का नुकसान जोड़ दें तो नुकसान करीब 350 करोड़ के आसपास पहुंच जाता है।
प्रदेश सरकार पर्यटन कारोबार को पटरी पर लाने की कोशिशों में जुटी है, लेकिन उसे यह समझना होगा कि राज्य का पर्यटन और तीर्थाटन का कारोबार ट्रांसपोर्ट की पटरी पर दौड़ता है। जब तक ट्रांसपोर्ट पटरी पर नहीं आएगा, तब तक पर्यटन और अन्य कारोबार भी जोर नहीं पकड़ पाएगा। कोरोनाकाल के चार महीनों में दूसरे तमाम क्षेत्रों की तरह ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी हाहाकार मचा है।
कारोबारी कोई बहुत बड़े पैकेज की मांग नहीं कर रहे हैं। वे छोटी-छोटी रियायतें चाहते हैं, जो जाम और पंचर हो चुके ट्रांसपोर्ट के पहियों को फिर से दौड़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं। परिवहन महासंघ की मानें तो सरकार रियायतें देगी तो बसों का संचालन होगा। सरकार ने बेशक आधी सवारी के साथ डबल किराया वसूलने की छूट दी है, लेकिन इसका खास फायदा नहीं हो रहा है।
200 करोड़ के कारोबार पर फिरा पानी
22 मार्च को लॉकडाउन के बाद से प्रदेश में सार्वजनिक वाहनों को पहिये जाम हो गए। तब से पूरा पर्यटन और चारधाम का सीजन कोरोनाकाल की भेंट चढ़ गया। एक मोटे अनुमान के अनुसार प्रदेश में व्यावसायिक वाहनों का संचालन ठप होने से करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। बेशक सरकार ने प्रदेश के लोगों के लिए चारधाम यात्रा को खोल दिया है, लेकिन चारधाम में व्यावसायिक वाहनों के संचालकों को कोई फायदा नहीं हुआ है। उनका कारोबार पूरी तरह से बाहरी राज्यों के यात्रियों के भरोसे चलता है।
तीन महीने तक 1650 बसों के पहिये जाम
कोरोनाकाल के करीब तीन महीने तक संयुक्त रोटेशन की करीब 1650 बसों के पहिये जाम रहे। इनमें से हर बस औसतन दो और सीजन के दौरान तीन-तीन चक्कर लगा लेती थी। उत्तराखंड परिवहन महासंघ के मुताबिक 30 जून तक 25-30 करोड़ का नुकसान हुआ। इसमें यदि असंगठित क्षेत्र के मैक्सी-टैक्सी, टैंपो-ट्रैवलर व इनोवा वाहनों को शामिल कर दें तो कुल नुकसान 100-150 करोड़ रुपये के आसपास बैठता है। असंगठित क्षेत्र में 11,000 टैक्सी-मैक्सी व अन्य वाहन हैं।
परिवहन कारोबारियों को इन रियायतों की दरकार
-1.50 लाख चालक-परिचालकों को एकमुश्त 10-15 हजार आर्थिक सहायता
-व्यावसायिक वाहनों का दो साल का टैक्स माफ हो
-वाहनों की आयुसीमा दो साल कर दी जाए
-वाहनों का एक साल का वैध बीमा हो माफ
प्रदेश सरकार ने जो राहत दी
-1000 रुपये चालक परिचालक को एकमुश्त राहत
-03 महीने का टैक्स माफ किया
-02 गुना किराये और आधी सवारी के साथ वाहनों का संचालन