राजकीय दून मेडिकल अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. शशि उप्रेती ने बताया कि प्लाज्मा दान करने वाले को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। बल्कि प्लाज्मा दोबारा से जल्द ही रिकवर हो जाता है।
तीन से चार घंटे की है पूरी प्रक्रिया
प्लाज्मा दान करने आने वाले व्यक्ति की पहले तमाम जांचें होती हैं। जो कि बाजार में बहुत महंगी दरों पर होती हैं। साथ ही एंटीबॉडी की जांच भी होती है। सब कुछ ठीक होने पर ही प्लाज्मा देने वाले को ब्लड बैंक में रखा जाता है। करीब 45 मिनट की प्रोसेसिंग में प्लाज्मा निकाल लिया जाता है।
बाकी खून वापस दूसरी नली से उसी इंसान के शरीर में चला जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, जिस दिन कोई इंसान पॉजीटिव आया, उसके 40 दिन बाद वह प्लाज्मा दान कर सकता है। पूरी तरह से स्वस्थ्य होने और एंटीबॉडी बनने के बाद ही प्लाज्मा लिया जाता है।
दून अस्पताल के ब्लड बैंक में लोग प्लाज्मा दान करने बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं। जो आ रहे हैं वे भी स्वैच्छिक कम ही हैं। किसी का परिजन या परिचित गंभीर अवस्था में है तो ही आ रहे हैं। दून अस्प्ताल के ब्लड बैंक में 10 से अधिक लोगों ने ही अभी तक प्लाज्मा दान किया है। जबकि 20 से अधिक लोग ऐसे थे जो प्लाज्मा दान करने पहुंचे, लेकिन उनके खून में एंटीबाडीज नहीं मिली।
चार मरीजों को दिया जा चुका प्लाज्मा
दून अस्पताल में भर्ती चार मरीजों को प्लाज्मा दिया जा चुका है। जिसमें से दो मरीजों में यह कामयाब नहीं रहा और उनकी मौत हो गई। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मौत के अन्य कारण भी थे।
एंटीबॉडीज न बनने का कारण स्पष्ट नहीं
डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना से जंग जीत चुके कई मरीजों में एंटीबॉडीज नहीं बन रही हैं। चूंकि यह नई बीमारी है इसलिए इस बारे में अभी बहुत ज्यादा शोध न होने वजह से कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।