सरकार ने ग्राम प्रधानों से कहा है कि कोविड जांच के लिए तुरंत ही जिला प्रशासन से मांग की जाए और संक्रमित व्यक्तियों को आइसोलेशन वार्ड या अस्पताल भेजने की व्यवस्था की जाए। पंचायतराज सचिव हरि चंद्र सेमवाल की ओर से इसका आदेश जारी किया गया है।
प्रदेश सरकार ने नौ मई को आदेश जारी कर कहा था कि गांव लौट रहे प्रवासियों को सात दिन के लिए पृथकवास में रहना होगा। इसी के साथ ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया गया था। कोविड नियंत्रण समिति में आंगनबाड़ी, आशा, मंगलदल के सदस्य आदि शामिल किए गए हैं।
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अब ग्राम पंचायत स्तर पर बनी इस कमेटी को ही शासन ने कोविड जांच की मांग जिला प्रशासन से करने को कहा है। इसी के साथ ग्राम प्रधानों को यह भी कहा गया है कि गांवों में कोविड सेंटर आदि की व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाए और कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो तुरंत ही उसे अस्पताल या कोविड केयर सेंटर में पहुंचाया जाए। घरों में रह रहे संक्रमित लोगों को ई संजीवनी के जरिए चिकित्सकों से बात कराने को कहा गया है।
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अनाथ बच्चों की जानकारी भी मांगी
ग्राम प्रधानों को यह भी कहा गया है कि कोविड के कारण माता-पिता की मृत्यु होने पर अनाथ होने वाले बच्चों की जानकारी तुरंत ही शासन को दी जाए। कहा गया कि हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति ने भी इसके आदेश जारी किए हैं।
हेल्प डेस्क नंबर भी जारी किया
शासन ने कहा है कि ग्राम पंचायतों को किसी तरह की परेशानी होती है तो इसके लिए हेल्प डेस्क नंबर पर जानकारी दी जाए।
181004190444 इसी के साथ जारी किया गया है।
चार जिलों में पंचायतों ने किया बेहतर काम
पंचायत सचिव के मुताबिक उत्तरकाशी, नैनीताल, पौड़ी और पिथौरागढ़ में पंचायतों ने बेहतर काम किया है। अन्य ग्राम पंचायतों को इन पंचायतों के बारे में जानकारी लेने और इनका अनुकरण करने को भी कहा गया है।
अन्य मुख्य निर्देश
- सभी पंचायत प्रतिनिधियों को मई माह में ही कोविड टीका लगाया जाएगा। प्रदेश में साठ हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधि हैं।
- प्रवासियों के बारे में जानकारी जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए प्रतिदिन दी जाए।
- ग्राम पंचायत स्तरीय कोविड नियंत्रण समिति को आइवरमेक्टिन दवा के वितरण में सहयोग करने को कहा गया है। प्रदेश सरकार ने हर घर में यह दवा पहुंचाने का फैसला किया है।