कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों ने बच्चों और माता-पिता के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया तैयार करने पर जोर दिया है। इसी के साथ जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर बच्चों के उपचार से संबंधित सभी स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाने का सुझाव भी दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में दस से 18 साल तक के बच्चों के प्रभावित होने की आशंका अधिक रहेगी। दस साल तक के बच्चों को खतरे से बाहर माना जा सकता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और संक्रमण का उन पर कम प्रभाव होगा।
यह भी कहा गया कि बच्चों की देखभाल करने वाले माता-पिता और अन्य किसी तीमारदार के लिए भी अलग से व्यवस्था करनी होगी। वेबिनार में गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हेमचंद्र पांडे ने कहा कि तीसरी लहर से बचाव की रणनीति में विशेषज्ञों के सुझाव महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य, उपचार और देखभाल को लेकर हिमालयन अस्पताल की ओर से एसओपी तैयार की जाएगी। इसके साथ ही अस्पताल के स्तर से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वेबिनार में कई बाल रोग विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
उत्तरकाशी में सभी पंचायत प्रतिनिधियों को टीके लगे
पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश में ग्राम प्रधानों का टीकाकरण का पहला चरण पूरा कर लिया है। सचिव हरि चंद्र सेमवाल ने बताया कि सभी पंचायत प्रतिनिधियों का टीकाकरण होना है और इसके लिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए जा चुुके हैं। उत्तरकाशी में सभी पंचायत प्रतिनिधियों का टीकाकरण किया चुका है।