माना जा रहा है कि सरकार अभी उन अस्पतालों की सूची जारी करेगी, जिन्हें कोविड इलाज का जिम्मा दिया जाएगा। ऐसा हुआ तो कोविड कचरा एकत्र कर रही कंपनियों को भी आसानी हो जाएगी।
1.5 टन कोविड कचरा रोज पैदा हो रहा है प्रदेश में
रोजाना 1.35 टन कोविड कचरा प्रदेश में काम कर रही दो कंपनियां उठा रही हैं। इस कचरे को हल्द्वानी में लगे इंसीनरेटर को भेजा जा रहा है। जबकि .15 टन (150 किलो) कोविड कचरा दुर्गम स्थानों से इंसीनरेटर तक नहीं पहुंच रहा है। इसलिए उसे जमीन के अंदर गहराई में दबाया जा रहा है।
3200 अस्पतालों की सूचना अभी तक पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिली है। इन अस्पतालों को बायो मेडीकल वेस्ट के नियमों के तहत बोर्ड से अनुमति लेनी है। 2800 अस्पतालों की तरफ से आवेदन किया गया है। 2400 अस्पतालों को अनुमति दी जा चुुकी है।
हर रोज लिया जाता है कोविड कचरे का हिसाब
प्रदेश में जितना भी कोविड-19 वेस्ट निकल रहा है, उसका हिसाब रखा जा रहा है और उसका निस्तारण सही तरीके से हो रहा है। इसके लिए एक एप भी बनाया गया है। जिसके जरिये रिपोर्टिंग हो रही है। बोर्ड की तरफ से सभी सीएमओ को भी नियमों के हिसाब से कचरे को निपटाने के लिए कहा गया है।
- एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड