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Coronavirus in Uttarakhand : कोविड ने रोक दिया शून्य से 18 वर्ष तक के 150 बच्चों का इलाज

Tue, 24 Nov 2020 12:23 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजीव शुक्ला, अमर उजाला, हल्द्वानी
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कोरोना वायरसः सैंपल लेते कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला (File Photo)
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कोरोनाकाल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 वर्ष तक के 150 बच्चों को इलाज नहीं मिल पाया। ये बच्चे कुमाऊं के छह जिलों के हैं।

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इन बच्चों को इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाना था लेकिन कोविड-19 के कारण ऐसा करने से बचा गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब अति गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बच्चों को इलाज के लिए भेजा जाने लगा है।  

एनएचएम के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित होता है। कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 वर्ष के बच्चों की जन्मजात बीमारियों का निशुल्क इलाज होता है। बच्चों को डीआईसी (डिस्ट्रिक्ट अरली इंटरवेंशन सेंटर) लाया जाता है और वहां परीक्षण करने के बाद डॉक्टर उनको हायर सेंटर रेफर करते हैं।
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हृदय में छेद, कटे हुए होंठ, आंखों की सर्जरी, कान की सर्जरी और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (रीढ़ की हड्डी या दिमाग में फोड़ा या उभार, जिनका समय पर इलाज न होने पर विकलांगता हो सकती है) समेत अन्य बीमारियों का इलाज इस कार्यक्रम के तहत होता है।

बच्चे को परिजनों के साथ  ऋषिकेश एम्स, जॉलीग्रांट या फोर्टिस भेजा जाता है। बच्चे को भेजने और इलाज के बाद वापस बुलाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है। हालांकि कार्यक्रम से जुड़े एक डॉक्टर का दावा है कि अगस्त से इलाज की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नैनीताल जिले में 36 बच्चों का इलाज होना था और सभी को इलाज के लिए भेजा जा चुका है। 

जिला -  इलाज के लिए चयनित बच्चे 
अल्मोड़ा  - 09
नैनीताल - 36
बागेश्वर  - 16
चंपावत -  14
पिथौरागढ़ - 60
यूएसनगर - 15

अतिगंभीर बीमारियों से ग्रस्त बच्चों को इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया था। साथ ही विशेषज्ञों की राय भी जरूरतमंद मरीजों को दिलाई जा रही है। कोविड के केस फिर से बढ़ने लगे हैं ऐसे में बच्चों को हायर सेंटर भेजने से बचा जा रहा है। 
-डॉ. शैलजा भट्ट स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं 

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कोविड में कुमाऊं में आरबीएसके की टीमों को किया जाए मुक्त 

कोविड में लगी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों को कार्यमुक्त करने के लिए एनएचएम की निदेशक ने आदेश जारी किए हैं। स्कूल खुलने के साथ ही अब सर्वे का काम दोबारा शुरू होगा। 

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत टीमें स्कूलों में जाकर सर्वे करती हैं और जन्मजात बीमारियों से ग्रस्त बच्चों का डाटा तैयार करती हैं। ऐसे बच्चों को निशुल्क इलाज दिलाया जाता है। मार्च से कोविड 19 के कारण कार्यक्रम में काम करने वाले एनएचएम कर्मियों को भी कोरोना ड्यूटी में लगा दिया गया था।

कोविड के केस कम होने के कारण एनएचएम की निदेशक सोनिका ने 21 नवंबर को स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं, सभी जिले के सीएमओ और सीएमएस को पत्र लिखा है। पत्र में टीम को स्कूलों में बच्चों का परीक्षण करने के लिए निर्देश देने को कहा गया है। स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं डॉ. शैलजा भट्ट ने बताया कि टीमों को जल्द सर्वे एवं परीक्षण करने को कहा जाएगा। 

जिला  -  कोविड में लगी टीमें 
अल्मोड़ा - 12
नैनीताल - 15
बागेश्वर -  07
चंपावत -  08
पिथौरागढ़ - 09
यूएस नगर - 18
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