रुड़की में कोरोना की जांच कराने आए युवक ने सिविल अस्पताल में हंगामा कर दिया। सूचना मिलते ही अस्पताल में तैनात पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसी तरह युवक को शांत कराया। इसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू हो पाई।
सिविल अस्पताल में प्रथम तल पर कोरोना की जांच के लिए ओपीडी बनाई गई है। इसमें कोरोना की जांच के लिए बाहर से आने वाले लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। सोमवार को भी बाहर से आए कई लोग जांच के लिए पहुंचे थे। ओपीडी के बाहर लंबी लाइन लगी थी।
कुछ लोग 14 दिन की क्वारंटीन अवधि पूरी कर फिटनेस सर्टिफिकेट लेने आए थे। डॉक्टर एक-एक कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे थे। कई लोगों स्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ी होने पर सैंपल देने और क्वारंटीन होने के लिए बोला जा रहा था। इस बीच लाइन में लगे एक युवक ने क्रम से लोगों को नहीं बुलाने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया।
उसका कहना था कि जो लोग सुबह खड़े हैं, उन्हें बुलाया नहीं जा रहा है, जबकि बाद में आकर लोग पहले जांच करा रहे हैं। पुलिसकर्मी और अस्पताल कर्मचारियों ने किसी तरह उसे शांत कराया। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि सीनियर सीटिजन को कोई परेशानी न हो, इसलिए उनकी जांच पहले की जा रही है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत इलाज के बदले धनराशि न मिलने पर मेट्रो हॉस्पिटल ने ओपीडी बंद कर दी है। अब केवल भर्ती करने के बाद ही मरीजों का इलाज जारी रखा है।
मेट्रो हॉस्पिटल के सीईओ संदीप वैष्णव ने बताया कि ईएसआईसी का 14 करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें से आठ करोड़ बिना भर्ती कर इलाज और जांच करने का बकाया है, जबकि अन्य छह करोड़ भर्ती कर इलाज करने का बकाया है। यह धनराशि सन 2016 से बकाया है। बकाया न मिलने से अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रखना मुश्किल हो रहा है। सीईओ ने बताया कि बकाया का भुगतान न होने से ईएसआई के मरीजों के लिए 15 जून से ओपीडी बंद कर दी गई है।
वहीं दूसरी ओर भूमा अस्पताल के प्रवक्ता राजेंद्र शर्मा के अनुसार उनके अस्पताल के भी करीब पांच करोड़ रुपये ईएसआई के पास बकाया हैं। कई बार पत्राचार करने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल में इस सुविधा के तहत इलाज करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। केवल ऐसे मरीजों का ही इलाज किया जाता है, जो ऑनलाइन पंजीकरण कराकर आते हैं। सीधे अस्पताल में आने वालों का इलाज नहीं किया जा रहा है।