इधर, जिला सर्विलांस अधिकारी का कहना है कि मरीज की रिपोर्ट को लेकर कुछ भ्रम था। पोर्टल पर रिपोर्ट निगेटिव दिखाई गई थी, जबकि भौतिक रूप से रिपोर्ट मिली तो पॉजिटिव थी।
मरीज को होम क़्वारंटीन में भेजा गया था और घबराने की कोई बात नहीं है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीसी रमोला का कहना है कि उन्हें शिकायत मिली है। मामले की जांच बैठा दी गई है और जिला सर्विलांस अधिकारी से इस बाबत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के प्रांतीय महासचिव डॉ. हरदेव सिंह रावत ने इस घटना पर गहरा रोष प्रकट किया है। उनका कहना है कि आयुष चिकित्सक लगातार दबाव में काम कर रहे हैं। उन्हें पीपीई किट, मास्क, ग्लब्स भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।
कहीं किसी स्तर पर चूक होती है तो जिम्मेदार भी उन्हें ही ठहराया जाता है। जबकि उच्चाधिकारी साफ बच निकलते हैं। बालावाला स्थिति क़्वारंटीन सेंटर में युवक की आत्महत्या मामले में भी यही हुआ। इस मामले में दो आयुष चिकित्सकों को बिना उनका पक्ष सुने ही निलंबित कर दिया गया है। जिस तरह की परिस्थितियां हैं, उसे किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।