जीवन रक्षक दवाओं में शामिल रेडमेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए औषधि नियंत्रण विभाग ने निगरानी तंत्र विकसित किया है। औषधि नियंत्रण विभाग की इस पहल से कंप्यूटर पर एक क्लिक में इंजेक्शन खरीदने वाले, मरीज और अस्पताल का पूरा विवरण आ जाएगा।
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शासन-प्रशासन और औषधि नियंत्रण विभाग ने रणनीति बनानी शुरू की
कोरोना संक्रमण में इस्तेमाल होने के कारण कुछ दिन पहले रेडमेसिविर इंजेक्शन की खूब कालाबाजारी हुई। कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों और अस्पतालों ने इंजेक्शन के एवज में 50 हजार रुपये तक वसूले। यह मामला संज्ञान में आते ही शासन-प्रशासन और औषधि नियंत्रण विभाग ने रणनीति बनानी शुरू की।
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दवा की दुकानों पर इंजेक्शन उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था बनाई
राज्य के औषधि नियंत्रक ताजबार सिंह जग्गी के नेतृत्व में जिले के औषधि निरीक्षकों ने दवा की दुकानों में जांच शुरू की। साथ ही अस्पतालों के भी दस्तावेजों की छानबीन की गई। इसके बाद औषधि नियंत्रण विभाग ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने की निगरानी खुद संभाल ली। इसके तहत दवा की दुकानों पर इंजेक्शन उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था बनाई गई है।
अब इंजेक्शन की खरीद करने वाले का परिचयपत्र, मरीज का आधार कार्ड, अस्पताल का नाम और डॉक्टर का परिचय आदि जानकारी दवा विक्रेता को अपने कंप्यूटर व कागजी दस्तावेजों में दर्ज करनी होगी। एक मरीज के नाम से दोबारा इंजेक्शन की खरीद होती है तो एक ही क्लिक पर इसकी जानकारी मिल जाएगी।
इसके अलावा मरीज को अब तक कितने इंजेक्शन, किस डॉक्टर की सलाह पर लगाए गए यह जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी। राज्य के औषधि नियंत्रक ताजबार सिंह जग्गी ने बताया कि रेडमेसिविर इंजेक्शन की जरूरतमंद मरीजों को उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। साथ ही इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार व शासन के निर्देश पर ठोस कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।