अब पलायन आयोग का अध्ययन बता रहा है कि इसमें इतने भी बुरे हालात नहीं हैं। आयोग इस समय दूसरे दौर का अध्ययन कर रहा है और अनलॉक-5 में यह भी सामने आया है कि कई जिलों में प्रवासी वापस अपनी जड़ों से जुड़ने की कोशिश में हैं।
टिहरी जिले में ही आयोग ने पाया कि करीब 65 प्रतिशत प्रवासी वापस जाने के इच्छुक नहीं हैं। इनमें से 25 प्रतिशत प्रवासी तो खेती से जुड़ भी चुके हैं। पौड़ी में यह तस्वीर अलग है। यहां करीब एक तिहाई प्रवासी ही रुकने का मन बना रहे हैं। पौड़ी जिला ही देश के उन चुनिंदा जिलों में शामिल है, जहां पलायन होने की वजह से जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर शून्य से नीचे है।
15 दिन में रिपोर्ट होेगी तैयार
पलायन आयोग के मुताबिक प्रवासियों से दूसरे दौर की बातचीत के आधार पर रिपोर्ट 15 दिन में तैयार हो जाएगी। पलायन आयोग विकासखंड स्तर पर इस रिपोर्ट को तैयार कर रहा है। पौड़ी में 15 विकास खंड हैं और इस वजह से इसमें समय लग रहा है।
प्रदेश सरकार वैसे प्रवासियों को रोकने के लिए कई तरह से कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और सौर ऊर्जा को आधार भी बनाया जा रहा है। इतना होने पर भी अभी यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि प्रवासी किस तरह के काम में खुद को शामिल करना चाहते हैं। आयोग के मुताबिक 25 प्रतिशत प्रवासी अगर सीधे खेती से जुड़े हैं तो यह आगे का रोड मैप भी तैयार करता है।
पलायन आयोग ने रिपोर्ट करीब-करीब तैयार कर ली है। यह 15 दिन में जारी भी हो जाएगी। सबसे उत्साहजनक तस्वीर टिहरी से सामने आई है। यहां करीब 35 प्रतिशत प्रवासी ही वापस लौटने के इच्छुक हैं। प्रवासियों की इस स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार को आगे की योजना भी तैयार करनी होगी।
- डा. एसएस नेगी, अध्यक्ष, राज्य पलायन आयोग