केस-1
चमन विहार निवासी सुभाष ने शहर के प्राइवेट लैब से कोविड-19 की सैंपलिंग कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उन्होंने एक दूसरी प्राइवेट लैब से दोबारा जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद वह पहली वाली लैब में पहुंचे, जहां उनकी लैब संचालक से तीखी नोकझोंक हुई।
केस-2
जीएमएस रोड निवासी दीपक कुमार ने निजी लैब से कोरोना संक्रमण की जांच कराई। उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन, मन में संशय होने पर उन्होंने दूसरी लैब में जांच कराई तो पता चला कि उन्हें कोरोना है। कमोबेश यहां भी स्थिति पहले केस की तरह ही रही।
गलत तरीके से लेते हैं सैंपल
अधिकारियों के मुताबिक कुछ प्राइवेट लैब के कर्मचारी लोगों के घर जाकर गलत तरीके से सैंपल एकत्र कर रहे हैं। उनके द्वारा सैंपल का टेंपरेचर मेनटेन नहीं किया जाता है, इसकी वजह से भी रिपोर्ट में गड़बड़ी होने की संभावना रहती है।
परिवार में अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो अन्य परिजनों में कोरोना का खौफ पैदा हो जाता है। भय के चलते वह भी अपना कोरोना टेस्ट करवाने लैब की ओर रुख करते हैं। जिसके चलते जांच के नाम पर प्राइवेट लैब मोटा पैसा बनाती हैं।
लैब संचालकों द्वारा गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी अलर्ट करते हुए प्राइवेट लैब पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अगर कोई लैब गड़बड़ी करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव