फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus: देहरादून में महंगी हुई ऑक्सीजन, डेढ़ गुना दामों पर अस्पतालों में हो रही सप्लाई

Sun, 20 Sep 2020 03:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • करीब डेढ़ गुना महंगे दामों पर अस्पतालों में आ रही है ऑक्सीजन
विज्ञापन
ऑक्सीजन सिलिंडर - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना का प्रकोप बढ़ने के साथ ही देहरादून में ऑक्सीजन की मांग और दाम भी बढ़ने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में ऑक्सीजन के दामों में करीब डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हो गई है। उधर, ऑक्सीजन की उपलब्धता भी संकट में आने लगी है।

विज्ञापन


बीते 15 दिनों में राजधानी में कोरोना मरीजों का आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ा है। इस बीच मरीजों के लिए ऑक्सीजन की जरूरत का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। पहले जहां रोजाना औसतन 50-70 मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 400 से ऊपर पहुंच गई है।


विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन को लेकर दिक्कत आने लगी है। भले ही स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि ऑक्सीजन की खरीद में अस्पतालों को भी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


जिसका सीधा असर कोरोना के गंभीर मरीजों और उनके परिजनों की जेब पर पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, पहले जहां ऑक्सीजन का छोटा सिलिंडर 200 रुपये का आ रहा था, वहीं अब इसकी कीमत 350 रुपये हो गई है।

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनूप डिमरी ने बताया कि कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर सरकार की तरफ से हर संभव सहयोग किया जा रहा है। किसी भी चीज में कमी न हो इसके लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

बाईपैप और वेंटिलेटर पर ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत

विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों और सांस लेने की प्रक्रिया पर पड़ता है। इंसान के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसलिए सबसे पहले सपोर्टिंग इलाज के साथ ही इंसान को ऑक्सीजन देनी पड़ती है। इमरजेंसी स्थिति से लेकर बाईपैप और वेंटीलेटर पर ऑक्सीजन की अत्यधिक आवश्यकता पड़ रही है।

सरकारी अस्पतालों में भी हो सकती है दिक्कत
सरकारी अस्पतालों में टेंडर किया जाता है, इसलिए वहां ऑक्सीजन की इतनी समस्या नहीं है। लेकिन अगर हालात यही रहे और कोरोना इसी तेजी के साथ बढ़ता रहा तो सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन सप्लाई और इसकी आपूर्ति को लेकर दिक्कत आ सकती है।

पैथकाइंड लैब की सैंपलिंग पर प्रशासन ने लगाई रोक 

कोरोना के मरीजों की टेस्टिंग रिपोर्ट में गड़बड़ी के चलते प्रशासन ने पैथकाइंड प्राइवेट लैब के टेस्टिंग करने पर रोक लगा दी है। इस लैब में सैंपलिंग की रिपोर्ट में गड़बड़ी की शिकायत प्रशासन को मिली थी। वहीं, जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। 

कोरोना काल में लोगों की सहूलियत के लिए निजी लैब को सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन, लगातार निजी लैबों में  गड़बड़ी की शिकायत मिल रही थी। पैथकाइंड लैब द्वारा भी गलत रिपोर्ट देने की सूचना प्रशासन को मिली थी। इस पर लैब के रिकॉर्ड की जांच की गई। पता चला कि पैथकाइंड लैब ने नौ सितंबर को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट 17 सितंबर को दी थी।

वहीं, 17 सितंबर को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट उसी दिन देने का रिकॉर्ड मिला। जबकि लैब द्वारा सैंपल जांच के लिए नोएडा भेजे जा रहे हैं। ऐसे में ठीक उसी दिन सैंपल लिए जाने और रिपोर्ट देने को लेकर भी संदेह है। जिसे देखते हुए प्रशासन ने लैब की सैंपलिंग पर रोक लगा दी है। साथ ही जांच बैठा दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसकी जांच की जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। 
विज्ञापन

यूपी में भी ब्लैक लिस्ट है लैब 

पैथकाइंड लैब द्वारा टेस्टिंग में गड़बड़ी के चलते उसे उत्तर प्रदेश में भी ब्लैक लिस्ट किया गया है। लैब के खिलाफ लखनऊ, सहारनपुर व कानपुर समेत आधा दर्जन जिलों में टेस्टिंग कर गलत रिपोर्ट देने की शिकायतें मिली थीं। जिसके बाद वहां के स्वास्थ्य महानिदेशक ने अगले आदेश तक लैब पर रोक लगा दी है।

आठ लोगों की टीम ने कुछ ही दिन में ले डाले 250 से अधिक सैंपल 
पैथकाइंड लैब में आठ लोगों की टीम काम करती है। रिकॉर्ड में इस टीम ने कुछ ही दिन में 250 से अधिक सैंपल लिए। गौर करने वाली बात यह है कि टीम घर से जाकर सैंपल लेती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टीम सैंपल लेने के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखती थी? हर जांच के दौरान ग्लब्स बदले जाते थे? मतलब साफ है लोगों की स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा था। 

मोबाइल और पता भी गलत मिले 
जांच में यह भी सामने आया कि लैब द्वारा कई लोगों के मोबाइल नंबर गलत दर्ज किए गए थे। इतना ही नहीं काफी संख्या में लोगों का पता भी गलत पाया गया। इससे यह सामने आया कि प्रशासन के निर्देश के बाद भी कोविड-19 का सैंपल लेने के दौरान संबंधित व्यक्ति का आधार चेक नहीं किया गया। इतना ही नहीं उसे तुरंत पोर्टल पर भी अपलोड नहीं किया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें