विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों और सांस लेने की प्रक्रिया पर पड़ता है। इंसान के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसलिए सबसे पहले सपोर्टिंग इलाज के साथ ही इंसान को ऑक्सीजन देनी पड़ती है। इमरजेंसी स्थिति से लेकर बाईपैप और वेंटीलेटर पर ऑक्सीजन की अत्यधिक आवश्यकता पड़ रही है।
सरकारी अस्पतालों में भी हो सकती है दिक्कत
सरकारी अस्पतालों में टेंडर किया जाता है, इसलिए वहां ऑक्सीजन की इतनी समस्या नहीं है। लेकिन अगर हालात यही रहे और कोरोना इसी तेजी के साथ बढ़ता रहा तो सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन सप्लाई और इसकी आपूर्ति को लेकर दिक्कत आ सकती है।
कोरोना के मरीजों की टेस्टिंग रिपोर्ट में गड़बड़ी के चलते प्रशासन ने पैथकाइंड प्राइवेट लैब के टेस्टिंग करने पर रोक लगा दी है। इस लैब में सैंपलिंग की रिपोर्ट में गड़बड़ी की शिकायत प्रशासन को मिली थी। वहीं, जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है।
कोरोना काल में लोगों की सहूलियत के लिए निजी लैब को सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन, लगातार निजी लैबों में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही थी। पैथकाइंड लैब द्वारा भी गलत रिपोर्ट देने की सूचना प्रशासन को मिली थी। इस पर लैब के रिकॉर्ड की जांच की गई। पता चला कि पैथकाइंड लैब ने नौ सितंबर को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट 17 सितंबर को दी थी।
वहीं, 17 सितंबर को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट उसी दिन देने का रिकॉर्ड मिला। जबकि लैब द्वारा सैंपल जांच के लिए नोएडा भेजे जा रहे हैं। ऐसे में ठीक उसी दिन सैंपल लिए जाने और रिपोर्ट देने को लेकर भी संदेह है। जिसे देखते हुए प्रशासन ने लैब की सैंपलिंग पर रोक लगा दी है। साथ ही जांच बैठा दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसकी जांच की जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
पैथकाइंड लैब द्वारा टेस्टिंग में गड़बड़ी के चलते उसे उत्तर प्रदेश में भी ब्लैक लिस्ट किया गया है। लैब के खिलाफ लखनऊ, सहारनपुर व कानपुर समेत आधा दर्जन जिलों में टेस्टिंग कर गलत रिपोर्ट देने की शिकायतें मिली थीं। जिसके बाद वहां के स्वास्थ्य महानिदेशक ने अगले आदेश तक लैब पर रोक लगा दी है।
आठ लोगों की टीम ने कुछ ही दिन में ले डाले 250 से अधिक सैंपल
पैथकाइंड लैब में आठ लोगों की टीम काम करती है। रिकॉर्ड में इस टीम ने कुछ ही दिन में 250 से अधिक सैंपल लिए। गौर करने वाली बात यह है कि टीम घर से जाकर सैंपल लेती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टीम सैंपल लेने के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखती थी? हर जांच के दौरान ग्लब्स बदले जाते थे? मतलब साफ है लोगों की स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा था।
मोबाइल और पता भी गलत मिले
जांच में यह भी सामने आया कि लैब द्वारा कई लोगों के मोबाइल नंबर गलत दर्ज किए गए थे। इतना ही नहीं काफी संख्या में लोगों का पता भी गलत पाया गया। इससे यह सामने आया कि प्रशासन के निर्देश के बाद भी कोविड-19 का सैंपल लेने के दौरान संबंधित व्यक्ति का आधार चेक नहीं किया गया। इतना ही नहीं उसे तुरंत पोर्टल पर भी अपलोड नहीं किया गया।