अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले 24 घंटे में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित दो कोविड पॉजिटिव रोगियों की मौत हो गई, इसके अलावा 22 लोगों की सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जिनमें 8 लोग ऋषिकेश के हैं।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि अपर रोड, हरिद्वार निवासी निवासी 68 वर्षीय बुजुर्ग पिछले 7 वर्षों से हाइपरटेंशन व अस्थमा का मरीज है। वह 7 अगस्त को सांस लेने में दिक्कत, बुखार व पेट में दर्द की शिकायत पर एम्स इमरजेंसी में आए थे। जिनका कोविड सैंपल पॉजिटिव पाया गया था, लिहाजा उन्हें कोविड आईसीयू में भर्ती किया गया। जहां रविवार की देरशाम मरीज की मौत हो गई।
वहीं नई जाटव बस्ती, ऋषिकेश निवासी 60 वर्षीय पुरुष जो कि हाइपरटेंशन से ग्रसित था। उक्त व्यक्ति बीती 17 अगस्त को बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने पर एम्स में भर्ती किया गया था। जिसकी सैंपल रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव पाई गई थी। उक्त व्यक्ति को कोविड आईसीयू में रखा गया था, जहां उक्त मरीज की रविवार रात उपचार के दौरान मौत हो गई।
कोरोना संक्रमितों के मिलने पर जिले के दो क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है। इनमें देहरादून नगर निगम क्षेत्र स्थित गायत्री एन्क्लेव बद्रीपुर तथा विकासनगर के वार्ड-7 कल्याणपुर गीता भवन मार्ग को पाबंद किया गया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार को इसके आदेश जारी किए।
डीएम ने बताया कि गायत्री एन्क्लेव बद्रीपुर का वह हिस्सा पाबंद किया गया है, जिसके पूर्व में जगदंबा रतूड़ी का मकान, पश्चिम में दरबान सिंह का मकान, उत्तर में गायत्री एन्क्लेव मार्ग तथा दक्षिण दिशा में खाली प्लाट मौजूद है।
विकासनगर के वार्ड नं.-7 कल्याणपुर गीता भवन मार्ग तहसील का वह हिस्सा, जिसके पूर्व डिमरी के मकान तक, पश्चिम में शर्मा के मकान तक, उत्तर में आरपी सिंह रौतेला के मकान तक तथा दक्षिण दिशा में आशीष जैन के खाली प्लाट तक के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।
कोविड अस्पताल में तब्दील किए गए राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में कोरोना संबंधी मरीजों के लिए आरक्षित 200 बेड फुल हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन अब बंद पड़े वार्डों को खोलने जा रहा है।
जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिले में ऋषिकेश एम्स और दून अस्पताल में कोरोना पीड़ित मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। साथ ही कई कोविड केयर सेंटर भी बनाए गए हैं। यहां कम गंभीर और बिना लक्षण वाले मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है।
इसके बावजूद कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से अस्पताल पर दबाव बढ़ रहा है। सोमवार को दून अस्पताल में 200 बेड फुल हो चुके थे। ऐसे में बंद पड़े टीबी वार्ड और अन्य वार्डों को खोलने की तैयारी है।
कोरोना के स्टेट को-ऑर्डिनेटर एवं दून मेडिकल अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि अस्पताल में 330 मरीजों को भर्ती करने की क्षमता है। मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल अस्पताल को कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए जाने के बावजूद टीबी नियंत्रण विभाग के लगभग 10 कर्मचारी वहीं पर काम करने को मजबूर हैं।
लगभग साढ़े पांच महीने पहले दून अस्पताल को कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
वहां पर सिर्फ कोरोना और उसके संदिग्ध मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। इसके अलावा सभी तरह की ओपीडी और अन्य अनुभागों को बंद कर दिया गया था। महिला एवं प्रसूति रोग संबंधी मरीजों को भी जिला अस्पताल व गांधी शताब्दी अस्पताल भेजा जा रहा है।
इसके बावजूद टीवी नियंत्रण विभाग के लगभग 10 कर्मचारियों को अभी भी पहले के ही कक्ष में ड्यूटी कराई जा रही है। इनमें मिनिस्ट्रियल संवर्ग के कर्मचारी ज्यादा शामिल हैं। जबकि सैंपलिंग और दूसरा कार्य कोरोनेशन अस्पताल और दून अस्पताल की नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है।
कोविड अस्पताल में काम करने की वजह से इन कर्मचारियों पर भी कोरोना संक्रमण का खतरा है। दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि जरूरत के हिसाब से व्यवस्थाओं को अन्यत्र शिफ्ट किया गया है। जो रह गए हैं उन्हें भी सीएमओ से बात कर अन्य अस्पताल में शिफ्ट कराया जाएगा।