जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण कर्मेंद्र सिंह (पीसीएस) कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। विवि प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए पांच सितंबर तक निदेशक प्रशासन कार्यालय पूरी तरह बंद करने के आदेश कर दिए हैं।
निदेशक प्रशासन की आवाजाही कुलपति निवास में भी हुई थी। इसके चलते तराई भवन को भी आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया है। बता दें कि निदेशक प्रशासन की माता की मृत्यु हाल ही में हुई थी, जिसके चलते वह अवकाश लेकर घर चले गए थे और बीते बुधवार को ही उन्होंने विवि में कार्यभार ग्रहण किया था।
देहरादून जिले में कोरोना के 121 नए मरीज सामने आए
रविवार को दो डॉक्टरों समेत कोरोना संक्रमण के 121 नए मरीज सामने आए हैं। मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की टीम विभिन्न अस्पतालों में भर्ती करा रही है। रविवार को कोरोना संक्रमित आने वालों में नगर निगम में तैनात गार्ड भी शामिल है।
दो डॉक्टर भी कोरोना संक्रमित आए हैं। इसके अलावा 57 नए मामले एम्स ऋषिकेश से, 31 राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में पहले से भर्ती मरीज भी शामिल हैं। जबकि 28 मरीज निजी लैब से हुई जांच में संक्रमित आए हैं। रविवार रात तक संक्रमित मरीजों को एसीएमओ डॉ. यूएस चौहान और चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचित गर्ग की टीम अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों में भर्ती करा रही थी।
देहरादून में भारतीय स्टेट बैंक, एसबीआई के हाथीबड़कला स्थित प्रशासनिक कार्यालय में कोरोना का खौफ हावी हो गया है। यहां तीन दिन के भीतर 17 कोरोना पॉजिटीव केस सामने आए हैं। बावजूद इसके कार्यालय को बंद न करने की वजह से कर्मचारियों में नाराजगी और कोरोना का खौफ भी है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि वह लगातार सैनिटाइजेशन करा रहे हैं।
एसबीआई के प्रशासनिक कार्यालय में करीब 300 कर्मचारी व अधिकारी काम करते हैं। इसके अलावा बैंकिंग से जुड़े कार्यों के लिए यहां औसतन 150 लोग रोजाना आते-जाते हैं। बीते तीन दिनों से इस कार्यालय में कोरोना का खौफ हावी है। सूत्रों के मुताबिक, तीन दिन के भीतर यहां 17 कोरोना पॉजिटीव मामले सामने आ चुके हैं।
बाकी स्टाफ की भी सैंपलिंग हुई है, जिनकी अभी रिपोर्ट आनी बाकी है। कर्मचारी खुलकर तो नहीं बोल रहे लेकिन दबी जुबान में एसबीआई प्रशासन पर नाराजगी जता रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अभी तक दफ्तर को बंद नहीं किया गया है। न ही कोई सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कर्मचारियों को अब कोरोना संक्रमित होने का डर सता रहा है। वहीं, इस कार्यालय में रोजाना आने-जाने वाले बैंक ग्राहकों के लिए भी खतरा बना हुआ है।
जी हां, कोरोना के कुछ मामले सामने आए हैं। कार्यालय के जिस फ्लोर पर भी कोरोना संक्रमित सामने आते हैं, वहां गाइडलाइंस के तहत दो दिन उस फ्लोर को बंद रखते हैं। इसके साथ ही सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। घबराएं नहीं, गाइडलाइंस के तहत पूरी सतर्कता बरती जा रही है। -विवेकानंद यादव, चीफ मैनेजर, एचआर
अनलॉक 4.0 में दूनवासी सभी जरूरी सेवाओं को खोलने की वकालत कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि अब स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण की अनिवार्यता भी खत्म कर दी जानी चाहिए। सरकार ने रोजाना कितने भी लोगों को आने-जाने की व्यवस्था की है तो ऐसे में पंजीकरण का कोई मतलब भी नहीं रह जाता। इसके अलावा लोगों ने कोविड-19 में आवश्यक सतर्कता के साथ अन्य सेवाएं भी खोलने की मांग की है।
स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण से लोगों को अनावश्यक दिक्कत हो रही है। विशेषकर जो लोग टेक्नोलॉजी फ्रेंडली नहीं है, उनके लिए यह किसी बड़े सिर दर्द से कम नहीं। इसलिए जब आवाजाही पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं है तो इस व्यवस्था को भी खत्म कर दिया जाना चाहिए।- राजू सिंह, देहरादून
धीरे-धीरे व्यवस्थाएं सामान्य हो रही है और ज्यादातर चीजें खुल रही हैं। सरकार को उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए जिनके कामकाज पूरी तरह बंद पड़े हुए हैं। अब वक्त आ गया है कि उनको भी काम करने का मौका दिया जाए।-लोकेश ओझा, देहरादून
कोरोना के चलते हालात बेहद मुश्किल हैं और लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा रहा है। जिन लोगों के कामकाज कोरोना के कारण बंद किए गए हैं, उनको अब खोल दिया जाना चाहिए। वैसे भी सरकार ज्यादातर चीजें पहले ही खोल चुकी है। -विपुल सागर, देहरादून
अब आम लोगों ने भी कोरोना के साथ जीना सीख लिया है। कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, उसके बावजूद बाजारों में भीड़ है। लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि खुद ही सारी सेवाएं खोल दें।- विपिन काम्बोज, देहरादून