संकेत के पिता अश्वनी मेहरा ने देहरादून पहुंचकर बेटे की अस्थियां प्राप्त की। शुक्रवार को अश्वनी ने अमर उजाला ऑफिस पहुंचकर अपना दर्द साझा किया। उन्होंने बताया संकेत दो बेटों में सबसे छोटा था। इसी साल जनवरी में संकेत की रेलवे में नौकरी लगी थी।
लॉकडाउन में वह बड़ोदरा में फंस गया था। श्रमिक ट्रेन चली तो संकेत दिल्ली आ गया था। दिल्ली से वह देहरादून क्यों आया इसका उन्हें भी पता नहीं? संकेत ने बड़े भाई को फोन पर यह जानकारी दी थी कि वो क्वारंटीन सेंटर में हैं। लेकिन, लोकेशन नहीं बता पाया था।
12 जून को रायपुर से उन्हें फोन आया तो घटना का पता चला। पिता मेहरा का आरोप है कि बेटे की जान सरकारी अव्यवस्थाओं से गई है। सात जून से 11 जून तक कोई कर्मचारी उसे देखने तक नहीं गया। संकेत बेहद खुशमिजाज और घूमने का शौकीन था। सवाल किया कि क्वारंटीन सेंटर में उसके हाथ रस्सी कैसे आई? दूसरा संकेत का मोबाइल और आईडी कार्ड कहां गया? पुलिस भी दोनों चीजें न मिलने की बात कह रहे हैं। अब वह बेटे के लिए इंसाफ चाहते हैं।