बाइक से आए तीर्थयात्री सुरजीत, सतनाम, मंजीत, हरपाल, हरभजन कौर, मंदीप सिंह आदि का कहना था कि इस बार जोड़ मेले में नहीं आने से मायूसी हुई, लेकिन अब गुरु दरबार में मत्था टेकने से उन्हें आध्यात्मिक शुकून मिला है।
बता दें कि रीठा साहिब में हर साल होने वाला तीन दिन (3 जून से 5 जून तक) का प्रसिद्ध जोड़ मेला इस बार नहीं हुआ। आमतौर पर इस मेले में डेढ़ लाख से अधिक तीर्थयात्री शिरकत करते थे। लेकिन ये मेला इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गया। मेला नहीं होने से आध्यात्मिक गतिविधियां तो नहीं हुई, साथ ही कारोबार को भी झटका लगा है।