स्थिति यह है कि दून अस्पताल से इमरजेंसी कक्ष के गेट से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाने के लिए कहा जा रहा है। वहीं, निजी अस्पतालों में भी लगभग आईसीयू और दूसरे बेड फुल होने लगे हैं। इससे निपटने के लिए अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एक तो कम गंभीर और बिना लक्षण वाले मरीजों को ज्यादा से ज्यादा होम आइसोलेशन में रहने या कोविड केयर सेंटर भेजने की सलाह दे रहा है।
साथ ही अस्पताल में नई बन रही बिल्डिंग में कार्यदायी संस्था को चेतावनी दे दी गई है कि एक हफ्ते के भीतर बिल्डिंग को तैयार कर लिया जाए। इसके बाद वहां जनरल बेड के साथ ही वेंटिलेटर युक्त 50 बेड का आईसीयू तैयार करने का मेडिकल कॉलेज प्रशासन दावा कर रहा है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि जल्द ही 50 बेड का आईसीयू और अन्य जनरल बेड तैयार कर लिए जाएंगे। जिससे अधिक से अधिक गंभीर कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जा सकेगा। उधर बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विभाग की ओर लोगों से वायरस से बचने के लिए एहतियात बरतने के लिए कहा जा रहा है।
कोरोना के मरीजों के इलाज से मना किया तो निजी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में इलाज की व्यवस्था न होने पर कोविड-19 अस्पताल का परामर्श लेना अनिवार्य होगा। यह निर्देश जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने निजी अस्पतालों के संचालकों को दिए।
उन्होंने कहा कि जिन निजी अस्पतालों में कोविड-19 संक्रमित मरीज भर्ती हैं, उसका इलाज केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन व अनुमन्य दरों के हिसाब से किया जाए। वहीं, डीएम ने निजी अस्पतालों के साथ ही जिले के लैब संचालकों को कोविड-19 से संबंधित जांच व इलाज को लेकर भी जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर समेत संबंधित ब्यौरा हरहाल में रजिस्टर में दर्ज किया जाए। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी।
446 प्रवासी फ्लाइट से पहुंचे दून
डीएम ने बताया कि रविवार को फ्लाइट से 446 प्रवासी दून पहुंचे। वहीं, 328 यात्री फ्लाइट से दूसरे राज्य को रवाना हुए। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने पर 134 लोगों के चालान किए गए। 817 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। होम क्वारंटीन 4805 लोगों को फोन के जरिये सर्विलांस किया गया। वहीं, एक व्यक्ति की काउंसिलिंग की गई।