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Coronavirus in Uttarakhand : देहरादून नगर निगम में न पैसा न मुलाजिम, सुविधाएं देना चुनौती

Mon, 07 Sep 2020 02:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • कोरोना काल के चलते इस वित्तीय वर्ष में निगम पर पड़ेगा बड़ा आर्थिक दबाव
  • रेवेन्यू बढ़ाने के लिए निगम कर रहा प्रयास, पर इसमें भी लगेंगे 8 से 10 महीने 
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देहरादून नगर निगम - फोटो : File Photo
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विस्तार
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न पैसा न मुलाजिम, सुविधाएं देना चुनौती। नगर निगम की स्थिति कुछ ऐसी ही है। कोरोना काल का असर निगम पर भी पड़ा है। इस वित्तीय वर्ष में निगम पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ना तय है। इसके लिए उसे सरकार का मुंह ताकना पड़ेगा। हालांकि निगम प्रशासन रेवेन्यू बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है, पर इसमें भी 8 से 10 महीने लगेंगे। साफ है कि इस वित्तीय वर्ष में निगम के पास रेवेन्यू नहीं आना है।
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दो साल पहले नगर निगम का विस्तार हुआ। 72 गांवों को मिलाने के बाद निगम का दायरा 60 से बढ़कर 100 वार्ड हो गया। निगम अपने सोर्स से आने वाले रेवेन्यू के जरिये ही सड़क, सफाई, नाला-नाली, निर्माण कार्य, लाइट व विकास कार्य करवाता है लेकिन इस बार रेवेन्यू न आने के चलते ये सभी काम प्रभावित हो सकते हैं।

निगम में करीब 2500 कर्मचारी हैं। हर महीने करीब 6 करोड़ रुपये वेतन आदि में खर्च होता है। इसके अलावा निगम को हाउस टैक्स, विज्ञापन, लाइसेंस फीस आदि से सालाना करीब 50 करोड़ रुपये मिलते हैं। वहीं, विकास कार्य आदि के लिए 100 करोड़ रुपये की ग्रांट शासन से मिलती है। जो काफी कम है।   
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रेवन्यू बढ़ाने को इन पर हो रहा काम 

19 स्थानों पर वेंडिंग जोन बनाना 

निगम प्रशासन ने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए शहर के तमाम स्थानों पर वेंडिंग जोन बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए 19 स्थान भी तय कर लिए गए हैं। वेंडिंग जोन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनाए जाएंगे। इसके अलावा जिस भी कंपनी को काम दिया जाएगा, उसे निगम को तय किया गया रेवेन्यू देना होगा। 

10 वेडिंग प्वाइंट का टेंडर जल्द 

कम आय वर्ग वालों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने शहर में 10 सस्ते वेडिंग प्वाइंट बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए शहर अलग-अलग स्थानों पर जगह भी तय कर ली गई है। निगम की ओर से वेडिंग प्वाइंट को लेकर प्रस्ताव भी मांगे गए हैं। प्रस्ताव आने के बाद इसके टेंडर कराकर काम शुरू कर दिया जाएगा। यह काम भी पीपीपी मोड में होगा। 

पीपीपी मोड में बनेंगे बस शेल्टर 

निगम नए वार्डों में करीब 50 बस शेल्टर भी बनाने जा रहा है। इससे जहां यात्रियों को बस और विक्रम लेने में राहत मिलेगी। वहीं, इस पर लगने वाले विज्ञापन के जरिये निगम के रेवेन्यू में इजाफा होगा। पीपीपी मोड में बनने वाले बस शेल्टर के लिए स्थान चिह्नीकरण का काम शुरू हो गया है। 

बजट होटल, अस्पताल, स्कूल पर भी होगा काम 

निगम आम लोगों के लिए बजट होटल, अस्पताल और स्कूल पर भी काम शुरू करेगा। होटल और अस्पताल के लिए दो से तीन स्थान चिह्नित भी कर लिए गए हैं। जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लेकर पीपीपी मोड पर काम शुरू करा दिया जाएगा। इनके जरिये भी निगम को रेवेन्यू मिलेगा। 

निगम के सामने चुनौतियां 

स्टाफ की कमी 

नगर निगम का दायरा तो बढ़ गया, लेकिन स्टाफ की कमी है। सफाई कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में नए वार्डों में और बेहतर तरीके से सफाई कार्य हो सके, इसके लिए स्टाफ बढ़ाना पड़ेगा। निगम भले ही स्थाई कर्मचारी न रखे, आउटसोर्स के जरिये भी काम कराया जा सकता है। 

हाउस टैक्स वसूलना 

कोरोना काल के चलते पिछले वित्तीय वर्ष में 75 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष महज 45 करोड़ रुपये ही हाउस टैक्स जमा हुआ। यानी कि लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया। ऐसे में इस वित्तीय वर्ष के करीब छह महीने पूरे होने वाले हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि इस साल भी लक्ष्य हासिल नहीं हो पाएगा। कोरोना के चलते जनता द्वारा नगर निगम को हाउस टैक्स का भुगतान काफी मुश्किल होगा।

कर्मचारियों को वेतन 

नगर निगम के कर्मचारियों को अभी तो वेतन समय पर मिल रहा है। लेकिन, कोरोना काल जल्द ही खत्म न हुआ तो वेतन देने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं। इसके अलावा वार्डों में सफाई के लिए हर वार्ड में स्वच्छता समिति भी बनाई गई है। हर स्वच्छता समिति में 5 से 8 सफाई कर्मचारी रखे गए हैं। ऐसे में उनका वेतन भी निगम के सामने चुनौती है। 

सफाई व्यवस्था करना 

निगम प्रशासन हर महीने सफाई पर लाखों रुपये खर्च करता है। दवा का छिड़ाव, फॉगिंग, सैनिटाइजेशन में काफी खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा रिस्पना, बिंदाल और सुसवा नदी के की सफाई भी बड़ी चुनौती है। सफाई इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इन नदियों के किनारे हजारों लोग बसे हैं। सफाई न होने से इससे उठने वाली बदबू से लोगों का सांस लेना दुश्वार हो जाएगा। 

कोरोना काल का असर निगम पर भी पड़ा है। जनता को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। निगम के पास रेवेन्यू के सीमित साधन हैं। ऐसे में रेवेन्यू बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है। जल्द उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा। वित्तीय स्थिति न सुधरने की स्थिति में सरकार से मदद ली जाएगी। - सुनील उनियाल गामा, मेयर
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