प्रत्येक गांव में दो जवान नियुक्त किए जाएंगे। यह ग्रामीणों को कोविड से जागरूकता के साथ ही मास्क भी देंगे। इसके अलावा सैनिटाइजेशन करेंगे और लोगों को सैनिटाइजर भी वितरित करेंगे। प्रतिदिन गांव की रिपोर्ट कंट्रोल रूम को प्रेषित की जाएगी।
जवानों के पास आवश्यकता होने पर ऑक्सीजन सिलिंडर भी फ्लोमीटर के साथ होगा। कोविड से आइसोलेट हुए ग्रामीणों को घर के बाहर न आने की हिदायत भी दी जाएगी। जवान प्रतिदिन लोगों को योग और प्राणायाम भी कराएंगे। एसडीआरएफ की टीम के पास मेडिसिन किट भी उपलब्ध है, जो जरूरत के हिसाब से दी जाएगी।
गांवों के नाम:
पिथौरागढ़- खोलिया और दौला गांव।
बागेश्वर- ऐठान
अल्मोड़ा- बलटा और माठ गांव।
चंपावत- ज्ञानखेड़ा
रुद्रप्रयाग- रामुपर, कलना।
पौड़ी- गोदी दुगड्डा, सिरौ, स्वीत और डूगरी पंथ।
टिहरी- कुट्ठा।
उत्तरकाशी- गणेशपुर, नेताला, क्यार्का, नगाण।
चमोली- रामणा, बोला, सीगधार और खडे़धार।
प्रतिदिन कर रहे पांच हजार को कॉल
वर्तमान में एसडीआरएफ हर दिन पांच हजार आइसोलेट हुए और संक्रमित हुए लोगों की जानकारी लेती है। इसके बाद इन्हें कंट्रोल रूम से भी लोगों को फोन किया जाता है। विशेषज्ञ प्रश्नोत्तरी के बाद घर जाकर मरीजों को चाही गई मदद पहुंचाते हैं।
उत्तराखंड पुलिस द्वारा प्रतिदिन ही लगभग पांच हजार से अधिक कॉल आइसोलेट हुए व्यक्तियों को किए जा रहे हैं। इसके अलावा एक टीम हाई रिस्क और लो रिस्क आइसोलेट हुए व्यक्तियों की पहचान कर रही है। साथ ही साथ लावारिस शवों का दाह संस्कार भी एसडीआरएफ ही कर रही है।