केस एक : हरिद्वार रोड निवासी प्रतिष्ठित परिवार के कुछ सदस्यों को कोरोना हुआ। कोरोना से परिवार के एक बुजुर्ग की मौत भी हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक तो परिजन को खोने का दुख और दूसरा उनके पड़ोस और कई खास लोगों ने दूरी बना ली। लोगों ने मकान के बाहर एक निश्चित दूरी से तो दूर फोन पर कॉल कर सांत्वना देना भी उचित नहीं समझा। मुखिया को कोरोना संक्रमित होने के बाद अपना और परिवार के दूसरे सदस्यों के स्वास्थ्य की चिंता है।
केस दो : हर्रावाला निवासी एक परिवार के दो सदस्यों को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई। परेशान परिजनों ने खुद ही निजी एंबुलेंस बुलाई और अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की इमरजेंसी से ही प्राथमिक जांच कर डॉक्टरों ने उन्हें कोविड केयर सेंटर भेज दिया। उनकी मदद को भी पड़ोस और रिश्तेदारी के अधिकतर लोग उस वक्त सामने नहीं आए।
केस तीन : डालनवाला निवासी एक युवक को कोरोना हुआ। वह खुद ही जाकर अस्पताल में भर्ती हो गया। उनके सामने अपनी बीमारी के साथ-साथ यह भी चिंता सता रही थी कि घर पर पत्नी और बच्चों को भी अगर संक्रमण हो गया हो तो उनका टेस्ट कैसे कराया जाए। बच्चे छोटे हैं, इसलिए लैब में ले जाने में दिक्कत थी। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने भी ऐसे समय में मदद नहीं की।