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Coronavirus in Uttarakhand : आखिर कितने परिवारों की खुशी लील लेगा यह कोरोना काल 

Mon, 21 Sep 2020 02:23 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • हर दिन बेरोजगारी लील रही है हंसते-खेलते परिवारों की खुशी 
  • ऋषभ के अंतिम संस्कार के दौरान कोरोना काल को कोसते रहा परिवार 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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कोरोना के कारण बेरोजगार हुए एक होनहार युवक के सामने जब कोई विकल्प नहीं बचा तो उससे आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में आत्महत्या का जो कारण उसने बताया, यह समस्या आज हर किसी के सामने है।

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कोरोना काल शुरू होने से लेकर आज तक बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण न कई परिवारों की खुशी छिन चुकी है। ऋषभ का रविवार को अंतिम संस्कार हो गया। लेकिन अपने पीछे जो रोते परिवार को वह छोड़। अंतिम संस्कार के दौरान भी हर कोई यही कहता हुआ नजर आया कि आखिर यह कोराना नाम की बीमारी कितने हंसते-खेलते परिवारों की खुशी को लील कर जाएगा। 
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ऋषभ की शादी जून में हुई थी। शादी से वह बहुत खुश था, लेकिन कोरोना के कारण कोचिंग सेंटर आदि बंद होने के कारण वह काफी परेशान भी चल रहा था। एक तो शादी की खुशी और दूसरा बेरोजगारी का गम। इस खुशी और गम में वह सामंजस्य नहीं बिठा पाया और वह कर बैठा जो उसे नहीं करना चाहिए था।

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बातचीत कर कई बार सबकुछ ठीक होने की बात भी कही

बताया जा रहा है कि कोचिंग सेंटर का किराया, ऊपर से कुछ लोन और कर्जदारी ऋषभ को परेशान कर रही थी। पुलिस के मुताबिक परिवार जनों से बातचीत में भी यह पता चला कि जब से कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हुआ तक से वह काफी परेशान चल रहा था।

परिजनों ने कईं बार उससे इस संबंध में बातचीत कर कई बार सबकुछ ठीक होने की बात भी कही। अंतिम संस्कार से पहले भी पत्नी, परिवार वाले भी यही कहते दिखे कि आखिर ऐसा क्यूं किया। धीरे-धीरे सबकुछ ठीक हो जाता और मिल बैठकर सब कुछ न कुछ कर लेते।

ऋषभ ही नहीं रोज कोरोना के कारण बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण रोज कोई न कोई इस प्रकार को गलत कदम उठाने को मजबूर हो रहा है। हर रोज अखबारों में आत्महत्या की खबर सामने आ रही है। अंतिम संस्कार के समय भी हर किसी के जुबान में यह शब्द थे आखिर कब तक हसंते-खेलते परिवारों की खुशी यूं ही गम में बदलती रहेगा। हर कोई कोरोना और कोरोना के कारण प्रदेश और देश में बढ़ती बेरोजगारी को कोसता नजर आया।
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