बताया जा रहा है कि कोचिंग सेंटर का किराया, ऊपर से कुछ लोन और कर्जदारी ऋषभ को परेशान कर रही थी। पुलिस के मुताबिक परिवार जनों से बातचीत में भी यह पता चला कि जब से कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हुआ तक से वह काफी परेशान चल रहा था।
परिजनों ने कईं बार उससे इस संबंध में बातचीत कर कई बार सबकुछ ठीक होने की बात भी कही। अंतिम संस्कार से पहले भी पत्नी, परिवार वाले भी यही कहते दिखे कि आखिर ऐसा क्यूं किया। धीरे-धीरे सबकुछ ठीक हो जाता और मिल बैठकर सब कुछ न कुछ कर लेते।
ऋषभ ही नहीं रोज कोरोना के कारण बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण रोज कोई न कोई इस प्रकार को गलत कदम उठाने को मजबूर हो रहा है। हर रोज अखबारों में आत्महत्या की खबर सामने आ रही है। अंतिम संस्कार के समय भी हर किसी के जुबान में यह शब्द थे आखिर कब तक हसंते-खेलते परिवारों की खुशी यूं ही गम में बदलती रहेगा। हर कोई कोरोना और कोरोना के कारण प्रदेश और देश में बढ़ती बेरोजगारी को कोसता नजर आया।