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Coronavirus in Uttarakhand : कोरोना की दूसरी लहर पर निर्भर करेगी महाकुंभ 2021 की भव्यता

Sat, 21 Nov 2020 10:04 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार/देहरादून
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- फोटो : AMAR UJALA FILE PHOTO
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प्रदेश में त्योहारी सीजन के बाद बढ़ती ठंड में कोरोना की दूसरी लहर का खतरा सता रहा है। इसका असर नजदीक आ रहे हरिद्वार महाकुंभ पर भी पड़ सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने साफ कर दिया है कि यदि कोरोना संकट गहराया तो अखाड़ों के शाही स्नान की सांकेतिक परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। उधर, प्रदेश सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि महाकुंभ का जो भी स्वरूप संत समाज तय करेगा, उसका अक्षरश: पालन होगा। शासन में 22 नवंबर को संतों के साथ बैठक है, जिसमें अखाड़ा परिषद अपनी यह राय रख सकता है।

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दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए अखाड़ा परिषद ने यह राय प्रकट की है। परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी और महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरी महाराज का कहना है कि महाकुंभ की भव्यता और दिव्यता कोरोना की स्थिति पर निर्भर करेगी। बता दें कि प्रदेश में कोरोना की दस्तक देने के दिन से ही महाकुंभ पर इसका साया मंडराने को लेकर आशंकाएं गहराती रही हैं। देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आई, लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है।

इसकी बानगी दिल्ली है, जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि हो रही है। राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग भी मान रहा है कि फेस्टिवल सीजन और बढ़ती सर्दी में कोरोना संक्रमण बढ़ सकता है। यानी कोरोना की दूसरी लहर राज्य में आ सकती है। हरिद्वार महाकुंभ का आयोजन जनवरी 2021 से अप्रैल 2021 तक होना है। ऐसे में महाकुंभ पर कोरोना का साया बना हुआ है। इस खतरे का एहसास संत समाज को भी है।
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कोरोना काल में महाकुंभ में जुटने वाली भीड़ को लेकर सरकार आशंकित है। ऐसी परिस्थितियों में अखाड़ा परिषद का बयान सरकार को राहत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि सरकार हिंदू धर्म के इस सबसे बड़े आयोजन के स्वरूप के  बारे में फैसला संत समाज पर ही छोड़ रही है। उसका कहना है कि संत समाज जो तय करेगा, सरकार को उसका पालन करना है। सरकार की ओर से सारी परिस्थितियां संत समाज के समक्ष रख दीं जाएंगी।

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गाइडलाइन का पालन करते हुए सारे कार्य होंगे

महाकुंभ में केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए सारे कार्य होंगे। यदि कोरोना को लेकर गाइडलाइन में 50 आदमी की अनुमति होगी, वहां हम चाहेंगे की 11 आदमी ही जाएं। कुंभ मेला अधिकारी जो निर्णय लेंगे, उसका पालन होगा। कोरोना की आफत बढ़ेगी तो हर अखाड़े से दो-दो आदमी नहाकर परंपरा का निर्वाह करेंगे। 13 अखाड़े के 26 लोग सांकेतिक स्नान करेंगे। इसमें कोई मतभेद नही है।
- श्री महंत हरिगिरी महाराज, महामंत्री, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

दिल्ली में कोरोना के केस बढ़ना सभी के लिए चिंता का विषय है। महाकुंभ नजदीक आने तक क्या स्थिति बनती है, उसी आधार पर निर्णय लिया जाएगा। महामारी ज्यादा फैलती है तो 13 अखाड़ों के संत समाज की आपात बैठक बुलाई जाएगी। उसमें सिर्फ संत-महात्माओं के शाही स्नान की घोषणा होगी।
- श्रीमहंत नरेंद्र गिरी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद   

महाकुंभ धार्मिक आयोजन है। सरकार की पूरी तैयारी है। कोरोना के दृष्टिगत अखाड़ा परिषद व संत समाज जो भी निर्णय लेगा, सरकार उसका अक्षरश: पालन करेगी। सरकार केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन और कोरोना की तस्वीर संत समाज के समक्ष रखेगी। वे जो निर्णय करेंगे, उसका सम्मान होगा।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री

केंद्र सरकार की एडवाइजरी है कि त्योहारी सीजन और सर्दियों में कोरोना के मामले बढ़ सकते हैं। दिल्ली में मामले बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड में मामले बढ़ेंगे या नहीं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन हमारी पूरी तैयारी है। मास्क न पहनने वालों के चालान किए जा रहे हैं, टेस्टिंग क्षमता बढ़ाई गई है।
- अमित नेगी, सचिव, स्वास्थ्य
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