महिला कल्याण निदेशक योगेंद्र सिंह यादव के मुताबिक बागेश्वर जिले में एक, अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में दो-दो बच्चे ऐसे मिले हैं जिनके माता-पिता की कोविड से मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की जरूरी सुविधा के संबंध में विभाग की ओर से पड़ताल की जा रही है।
इसके अलावा अन्य जिलों से भी इस संबंध में जानकारी मांगी जा रही है, लेकिन अब तक विभाग को मात्र पांच बच्चों के माता-पिता की कोविड से मौत की जानकारी मिली है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेेगी का कहना है कि वास्तव में इस तरह के बच्चों की संख्या कई अधिक होगी।
इस तरह के बच्चों को सरकार की योजना का वास्तविक लाभ मिल सके इसके लिए धरातल पर काम करना होगा। पुलिस, अस्पताल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता आदि की इसमें अहम भूमिका है। जिन्हें इन बच्चों की मदद के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।
जरूरतमंद बच्चों को एक अभियान के रूप में घर-घर जाकर तलाशना होगा। इसके अलावा अस्पतालों में कोविड मरीजों के भर्ती होने के दौरान उनसे एक परफॉर्मेट भी भराना होगा। जिसमें उनके बच्चों के बारे में जानकारी हो।
- ऊषा नेगी, अध्यक्ष बाल आयोग