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उत्तराखंड में कोरोना : ब्लैक फंगस को न करें नजरअंदाज, लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें

Sun, 16 May 2021 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस सामान्य रूप से राइजोपस प्रजाति से संबंधित है। यह आमतौर पर मिट्टी में पाया जाता है। ब्लैक फंगस संक्रमण के अस्पताल के साथ ही घरों में फैलने की आशंका रहती है।
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ब्लैक फंगस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों के लिए ब्लैक फंगस के लक्षण नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टरों की सलाह लें। आंख और नाक के पास लालिमा व दर्द ब्लैक फंगस के शुरूआती लक्षण हैं। इसके साथ ही बुखार के साथ खून की उल्टी भी हो सकती है। ब्लैक फंगस से आंख या जबड़े में इंफेक्शन होता है। जो खतरनाक हो सकता है।

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राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से ब्लैक फंगस से बचाव के लिए एडवायजरी जारी की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस सामान्य रूप से राइजोपस प्रजाति से संबंधित है। यह आमतौर पर मिट्टी में पाया जाता है।
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ब्लैक फंगस संक्रमण के अस्पताल के साथ ही घरों में फैलने की आशंका रहती है। जिसमें पुराने एयर कंडीशनर, सीलन युक्त कमरे, गंदे कपड़े, चादरें, घाव को ढकने के लिए प्रयोग में लाई गई पट्टी, मिट्टी के कमरों में हवादार न होना मुख्य कारण है।

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ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण

- आंख, नाक के पास लालिमा और चेहरे पर एकतरफा सूजन
- बुखार, खांसी, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, दर्द
- मानसिक स्थिति में बदलाव

ब्लैक फंगस कोरोना के बाद क्यों

ब्लैक फंगस उन लोगों में अधिक है, जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या इम्यून सिस्टम बहुम कमजोर होता है। ऐसे लोगों के शरीर में कीटाणु और बीमारी से लड़ने की क्षमता कम होती है। कोरोना संक्रमण से ठीक हुए जिन लोगों को मधुमेह, केटोएसिडोसिस, कैंसर, अंग प्रत्यारोपण, स्टेम सेल प्रत्यारोपण, न्यूट्रोपीनिया, लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा का उपयोग, शरीर में बहुत अधिक आयरन या हेमोक्रोमैटोसिस होता है।

ब्लैक फंगस से ऐसे करें बचाव

- खासतौर पर शुगर को कंट्रोल में रखें।
- डिस्चार्ज होने के बाद ब्लड शुगर जांचते रहें।
- स्टेरॉयड्स को लेकर डॉक्टरों की सलाह लें।
- ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान साफ पानी ही लें।
- एंटीबायोटिक्स, एंटी फंगल दवा सावधानी से लें।
- एन-95 मास्क ही उपयोग करें। नाक जरूर ढकें।
- जितना हो सके धूल वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
- मिट्टी और धूल के संपर्क में आने से बचें।
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