दून अस्पताल के ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. शशि उप्रेती ने बताया कि कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों को डाटाबेस के आधार पर काउंसिलर द्वारा फोन किए जा रहे हैं।
उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि रक्तदान या प्लाज्मा दान करने से उनके शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि रक्त और एंटीबॉडीज की मात्रा और भी तेजी से बढ़ती है। साथ ही कई तरह की महंगी जांचें भी अस्पताल में ब्लड डोनेशन से पहले निशुल्क की जा रही हैं।
ब्लड बैंक में खून भी वह खत्म
दून अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीजों को चढ़ाए जाने वाला खून भी लगभग खत्म हो गया है। कोरोना संक्रमण के डर से बहुत कम संख्या में लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए पहुंच रहे हैं। ब्लड बैंक से नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं को बाकायदा फोन भी किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद हफ्ते में एक या दो ही रक्तदाता रक्तदान को पहुंच रहे हैं। जिससे एक्सीडेंटल केस, गर्भवती महिलाओं, थैलीसीमिया के नियमित मरीजों समेत अन्य मरीजों और उनके परिजनों को भी शहर के निजी ब्लड बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इन ब्लड बैंकों में भी खून की मात्रा बहुत कम है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना, दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री, ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. शशि उप्रेती, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी और जनसंपर्क अधिकारी संदीप राणा ने भी लोगों से अपील की है कि कोरोना महामारी के इस संकट में आमजन के जीवन को बचाने के लिए स्वैच्छिक रक्तदान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करें।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में रक्तदान के लिए आने या रक्तदान करने पर कोरोना संक्रमण से डरने की जरूरत नहीं है। ब्लड बैंक को पूरी तरह से इससे अलग रखा गया है।