राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फिजिशियन डॉ. कुमार जी. कॉल ने बताया कि पोस्ट कोविड में थ्रोम्बोसिस हो सकता है। इसमें गंभीर एकतरफा सिरदर्द और आंखों में दर्द साथ-साथ होता है। दर्द आमतौर पर आंख के पीछे होता है। नाक में काली पपड़ी दिख सकती है।
स्टेरॉयड के लंबे समय तक अनजाने उपयोग, फेरिटिन के स्तर में वृद्धि, दांत-मसूड़ों में संक्रमण। वेंटिलेटर या ऑक्सीजन पर रोगियों में कोई वृद्धि नहीं हुई है, उनमें भी यह दिक्कत हो सकती है। यह होम आइसोलेशन में रह रहे रोगियों में भी देखा जाता है।
यह मधुमेह के रोगियों में तेजी से फैलने वाला एक फंगल संक्रमण है, जो कोविड संक्रमण के साथ ठीक हो जाता है। जिनके पास उचित शर्करा नियंत्रण नहीं होता है और गैर मधुमेह रोगियों में भी यह समस्या देखी जाती है।
सीएमआई अस्पताल के जाने-माने वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. महेश कुड़ियाल ने बताया कि फेफड़ों के अंदर छोटी-छोटी खून की नसों को भी वायरस ब्लॉक कर देता है। यह थक्का दिमाग और हृदय में जाकर हार्टअटैक और ब्रेन स्ट्रोक कर रहा है। इसके लिए शुरूआत में ही खून पतला करने की दवाई दी जाती हैं।
अगर कोविड-19 दिक्कत आ रही है तो उसके बाद एंटीवायरल और एस्टेरॉयड के साथ ही खून को पतला करने की दवाएं दी जा सकती हैं। ताकि दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
डी डाईमर समेत उनकी तमाम जरूरी जांच की जानी चाहिए। ताकि फेफड़ों में आ रहे संक्रमण का पता भी समय रहते चल सके और इसका उचित उपचार किया जा सके। अन्यथा की स्थिति में मरीज की जान को खतरा पैदा हो सकता है।
पंडितवाड़ी स्थित केयर मेडिकल सेंटर के वरिष्ठ छाती और सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि कोविड-19 में थ्रोम्बोसिस बीमारी बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है। इसमें फेफड़ों की छोटी-छोटी नसों में खून का थक्का जम जाता है। जो दिमाग और हृदय में चला जाता है।
इसके लिए खून को पतली करने की दवाइयां दी जाती हैं। मधुमेह वाले रोगियों में फेफड़ों में खून का थक्का जमने के साथ ही शरीर के विभिन्न अंगों के फेल होने का डर ज्यादा रहता है। इससे बचाव के लिए समय पर डी डायमर और खून की अन्य जांच की जरूरी है। साथ ही हल्का खाना, खरबूजा, नारंगी, अदरक, नींबू और ब्रोकली का सेवन इसके लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
थक्का जमने से जा सकती है रोशनी : डॉ. ओझा
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार ओझा ने बताया कि कोरोना वायरस सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं बल्कि आंखों को भी क्षतिग्रस्त कर रहा है।
फेफड़ों में थक्का जमने की वजह से यह आंखों के पर्दे की खून की नसों को भी ब्लॉक करने लगता है। इसकी वजह से एक आंख या दोनों आंखों की रोशनी कम या पूरी तरह से जा सकती है।
इसके लिए बचाव के साथ ही नियमित रूप से खूब पानी पिएं। डी-टाइमर टेस्ट कराएं। छाती रोग विशेषज्ञ और फिजीशियन से लगातार सलाह लें और जरूरत पड़ने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाकर जरूरत के हिसाब से दवा व एक्सरसाइज करें।
फेफड़ों की एक्सरसाइज जरूरी : डॉ. त्यागी
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट एवं फिजियोथेरेपी विभाग के प्रभारी डॉ. एसके त्यागी ने बताया कोरोना में छाती और फेफड़ों का संक्रमण बढ़ने से थक्का जमने की समस्या कई मरीजों में सामने आ रही है। जो कि शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा है।
इसलिए फेफड़ों की एक्सरसाइज किया जाना भी जरूरी है। वेंटिलेटर पर रहने के दौरान फेफड़ों को एक ही स्थिति में न रहने दिया जाए। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, कपलिंग मसाज जिसमें हथेली को कपनुमा बनाकर छाती के ऊपर रखकर मसाज की जाती है और कफ को निकालने के लिए कफ एक्सरसाइज किया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह ली जानी चाहिए।