कोरोना मरीजों के उपचार और देखभाल में लगे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को नींद में भी आईसीयू बेड और वेंटिलेटर आदि नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञ इसकी वजह लगातार कोरोना मरीजों के बीच ड्यूटी किए जाने और तनाव मान रहे हैं।
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विशेषज्ञ डाक्टरों के मुताबिक आमतौर पर यह समस्या आईसीयू में लंबे समय तक भर्ती रहने वाले मरीजों को डिस्चार्ज होने के बाद होती है। इस बार काफी समय से लगातार आईसीयू और कोविड मरीजों के बीच रहने के कारण तमाम डॉक्टरों और स्टाफ को भी यह समस्या हो रही है।
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वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. (मेजर) नंदकिशोर ने बताया कि लगातार तनाव भरे माहौल में ड्यूटी की वजह से यह समस्या आती है। अत्यधिक थकान भी एक इसका एक बड़ा कारण होता है। मेडिकल साइंस में इसे पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर या एडजस्टमेंट रिएक्शन टू स्ट्रेस कहा जाता है। पूरा आराम न मिलने से नींद न आना, चिड़चिड़ापन, अस्पताल के ख्यालात आने जैसी समस्याएं आ सकती हैं।
राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन एवं कोविड-19 के नोडल अफसर डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि कुछ लोग इसे आईसीयू साइकोसिस मानते हैं। इस समस्या को आईसीयू साइकोसिस करना उचित नहीं होगा। बल्कि लगातार आईसीयू में रहने से और मरीजों के बीच ड्यूटी करने की वजह से नींद न आना और अस्पताल के ख्यालात मन में आना समस्या हो सकती है।
इस समस्या से निजात पाने के लिए मन को बिल्कुल स्वत्रंत रखने और तनाव से दूर रहने की आवश्यकता है। वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. सोना कौशल के अनुसार कोरोना काल में डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी इससे प्रभावित होने से नहीं बच पा रहे हैं। कोरोना के दुष्प्रभाव से बचने के लिए योग, दिनचर्या को सही करना तनाव से दूर रहना मन को खुश रखना जैसे कार्य करने चाहिए।