फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रुड़की: कोरोना की आड़ में बॉर्डर पर चल रहा वसूली का खेल, शिकायत के बाद सिपाही सस्पेंड

Sun, 06 Sep 2020 07:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की

सार

  • प्राइवेट टैक्सी और कारों की 200 से 500 रुपये में करा रहे एंट्री
  • वेस्ट यूपी की प्राइवेट टैक्सी जिले में बिना परमिट ला रहीं सवारियां 
विज्ञापन
- फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना महामारी की आड़ में नारसन समेत अन्य बॉर्डर पर अवैध वसूली का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। जिले में एंट्री दिलाने के लिए 200 से 500 रुपये लिए जा रहे हैं। वेस्ट यूपी की प्राइवेट टैक्सियों को बिना परमिट के एंट्री दिए जाने का खेल भी जोरों पर है। टैक्सियों से सवारियों को लोकर जिले में एक चक्कर के बदले 500 से एक हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के पास ऐसी शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं।

विज्ञापन


कोरोना काल में जिले के नारसन, काली नदी, मंडावर समेत अन्य बॉर्डरों पर पुलिस और आईआरबी के जवानों की ड्यूटी लगी है। कोरोना काल के शुरुआती दौर में ई-पास पर ही एंट्री दी जा रही थी। कुछ दिन पहले गृह मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की थी कि अब किसी भी पास की जरूरत नहीं होगी। किसी भी राज्य में लोग बिना पास के जा सकेंगे। इसे लेकर जिले के बॉर्डर पर ई-पास की जगह पंजीकरण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पंजीकरण के बाद ही जिले में एंट्री दी जा रही है।

इसके साथ ही नारसन बॉर्डर पर अवैध वसूली का काम शुरू हो गया है। बॉर्डर पर तैनात पुलिसकर्मी प्राइवेट टैक्सियों और कारों की बिना पंजीकरण के एंट्री कराने के नाम पर 200 से 500 रुपये ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वेस्ट यूपी के मुजफ्फरनगर, मेरठ से जिले में सवारी लेकर आने वाली मैक्स से एक हजार रुपये प्रति चक्कर लिए जा रहे हैं। इनका परमिट तक नहीं है। 

विज्ञापन

मंगलौर का टैक्सी माफिया गिरोह सक्रिय

सूत्रों के अनुसार, जब से ई-पास की सुविधा खत्म की गई है, मंगलौर में एक प्राइवेट टैक्सी गिरोह सक्रिय हो गया है। यह गिरोह पुलिस से मिलीभगत कर वेस्ट यूपी से हरिद्वार तक टैक्सी से सवारी ढो रहा है। बिना परमिट के ही ये टैक्सियां धड़ल्ले से चल रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यह गिरोह पुलिस से मिलीभगत कर दिन और रात में बिना परमिट और पंजीकरण के सवारी ढोने का काम कर रहा है। 

रात को चलती हैं प्राइवेट बसें
अभी तक एक से दूसरे प्रदेश तक रोडवेज और प्राइवेट बसें चलने की अनुमति नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, रुड़की से मुजफ्फरनगर तक शाम ढलते ही प्राइवेट बसें सवारियां ढोनी शुरू कर देती हैं। सूत्रों का कहना है कि प्राइवेट बसों के संचालन में पुलिस और बस मालिकों की मिलीभगत है। इसके चलते पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर हाथ खींच लेती है।

अवैध वसूली में एक सिपाही पर कार्रवाई की गई है जबकि आईआरबी के दो जवानों के खिलाफ उनके कमांडेंड को पत्र लिखा गया है। बॉर्डर पर प्राइवेट टैक्सियों से अवैध वसूली व बसों के संचालन के बारे में भी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस, एसएसपी
विज्ञापन

अवैध वसूली में बॉर्डर पर तैनात सिपाही सस्पेंड

नारसन बॉर्डर पर ट्रक चालक से अवैध वसूली की शिकायत पर एसएसपी ने एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया है जबकि दोषी पाए गए आईआरबी के दो जवानों पर कार्रवाई के लिए कमांडेंट को पत्र लिखा गया है। एसएसपी की कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वहीं, एसएसपी के पास अवैध वसूली की कई और शिकायतें भी पहुंची हैं, जिसकी गोपनीय तरीके से जांच जारी है।

लॉकडाउन के दौरान से ही नारसन बॉर्डर पर पुलिस का कड़ा पहरा है। हर आने जाने वाले छोटे-बड़े वाहनों को रोककर तलाशी ली जा रही है। बिना पंजीकरण के किसी भी वाहन को एंट्री नहीं दी जा रही है। जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह मुजफ्फरनगर की ओर से आ रहे ट्रक को एक पुलिसकर्मी और आईआरबी के दो जवानों ने बॉर्डर पर ही रोक लिया। आरोप है कि तीनों ने ट्रक चालक को उत्तराखंड में प्रवेश देने के लिए 500 रुपये की मांग की। इस पर चालक ने 200 रुपये तो दे दिए, लेकिन पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 112 पर अवैध वसूली की शिकायत भी कर दी। इसे गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने मंगलौर के इंस्पेक्टर प्रदीप चौहान को मामले की जांच के आदेश दिए।

इस पर इंस्पेक्टर नारसन बॉर्डर पर पहुंचे और चालक से जानकारी ली। साथ ही सिपाही और दोनों जवानों से भी पूछताछ की। इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर जांच की तो शिकायत सही पाई गई। इंस्पेेक्टर ने मामले की रिपोर्ट एसएसपी को दी। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर एसएसपी ने बॉर्डर पर तैनात सिपाही मेहरबान सिंह को सस्पेंड कर दिया। साथ ही आईआरबी के जवान राहुल और इंतजार के खिलाफ कार्रवाई को उनके कमांडेंट के लिए पत्र लिखा है। वहीं, एसएसपी की कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मचा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें