चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बहुत अधिक स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक व एंटी फंगल दबाव के होने से ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा हो रहा है। ब्लैक फंगस के बैक्टीरिया हवा में मौजूद हैं जो नाक के जरिए पहले फेफड़े और फिर खून के जरिए मस्तिष्क तक पहुंच रहे हैं। जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। डॉ. विपुल कंडवाल के मुताबिक कोरोना संक्रमित उन मरीजों के ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है जो लंबे समय तक ऑक्सीजन के सहारे आईसीयू में हैं।
ब्लैक फंगस संक्रमित मरीजों के लक्षण
-मरीज की नाक से काला कफ जैसा तरल पदार्थ निकलता है।
-आंख, नाक के पास लालिमा के साथ दर्द होता है।
-मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
-खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द और बुखार होता है।
-मरीज को चेहरे में दर्द और सूजन का एहसास होता है।
-दांतों और जबड़ों में ताकत कम महसूस होने लगती है।
-इतना ही नहीं कई मरीजों को धुंधला दिखाई देता है।
-मरीजों को सीने में दर्द होता है।
-स्थिति बेहद खराब होने की स्थिति में मरीज बेहोश हो जाता है।
ऑक्सीजन मास्क की सफाई और पानी बदलते रहें
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों को ब्लैक फंगस से बचाया जा सके। इसके लिए आईसीयू में भर्ती मरीजों व घरों में आइसोलेट मरीजों के ऑक्सीजन मास्क के समय समय पर सफाई करने के साथ ही फ्लोमीटर के साथ लगे बोतल के पानी को नियमित अंतराल पर बदलें। पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल किया जाए। मरीजों के साथ ही सामान्य लोग भी अत्यधिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचें।
अत्यधिक शुगर लेवल वाले मरीजों को ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा
वरिष्ठ पल्मोलॉजिस्ट डॉ. अंकित अग्रवाल के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति का शुगर लेवल बहुत अधिक है तो ऐसे लोगों के ब्लैक फंगस से संकलित हो जाने का खतरा ज्यादा रहता है। साथ ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों पर ब्लैक फंगस तेजी से हमला करता है। ऐसे में यदि इससे बचना है तो लोगों को अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करना होगा। इसके लिए प्राणायाम व्यायाम करने के साथ ही खानपान पर ध्यान देना होगा।