राजकीय दून मेडिकल अस्पताल और ऋषिकेश एम्स के बाद अब निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए आईसीयू बेड फुल हो गए हैं। मरीज और उनके परिजन अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें बेड नहीं मिल पा रहा। यह स्थिति कोरोना मरीजों की जान पर भारी भी पड़ रही है।
पहले सिर्फ राजकीय दून मेडिकल अस्पताल और एम्स ऋषिकेश अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया जा रहा था। दून अस्पताल में आईसीयू के 35 बेड लगभग फुल चल रहे हैं। एम्स में भी कमोवेश यही स्थिति है। इसे देखते हुए सरकार ने कुछ निजी अस्पतालों में भी कोरोना मरीजों को सशर्त भर्ती करने की इजाजत दे थी। हालांकि अब इन अस्पतालों में भी कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर व्यवस्थाएं बौनी नजर आ रही हैं।
सरकारी अस्पतालों के बाद अब निजी अस्पतालों में भी आईसीयू के बेड लगभग फुल हो चुके हैं। कोरोना के मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत फेफड़ों में इंफेक्शन और सांस लेने में हो रही है। इसलिए ज्यादातर मरीजों को आईसीयू-वेंटीलेटर की जरूरत पड़ रही है। खास तौर पर बुजुर्ग और पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को।
मरीज अस्पतालों के चक्कर काट रहे
मौजूदा समय में हालत यह है कि मरीज अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें बेड नहीं मिल पा रहा। हालांकि सरकार और स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर युक्त आईसीयू बेड बढ़ाने की तैयारी में हैं। वहीं राजकीय मेडिकल अस्पताल में भी बहुत जल्द 100 बेड का आईसीयू तैयार किया जाना है। फिर भी कोरोना के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए हालात बेकाबू नजर आ रहे हैं।
अस्पतालों में आईसीयू की स्थिति
मैक्स अस्पताल : 10 बेड, सभी फुल
श्री महंत इंद्रेश अस्पताल : 20 बेड, सभी फुल
जौलीग्रांट अस्पताल : 25 बेड, 16 फुल
कैलाश अस्पताल- नौ बेड, सभी फुल
कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सरकार के निर्देश पर हर संभव व्यवस्थाएं बनाने में जुटा हुआ है। सरकारी और विभिन्न निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए जनरल और वेंटीलेटर युक्त आईसीयू बेड बढ़ाने की तैयारियां चल रही है।
- डॉ. अनूप डिमरी, सीएमओ