उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में कोरोना महामारी फैलने के साथ ही वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, भारतीय वन्यजीव संस्थान, वन अनुसंधान संस्थान, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया समेत कई केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध ठप पड़ गए हैं।
कोरोना संक्रमण की वजह से तमाम संस्थानों के वैज्ञानिक शोध करने के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं, जिसकी वजह से कई महत्वाकांक्षी शोध परियोजनाएं रुकी पड़ी हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो तमाम वैज्ञानिक शोधों को केंद्रीय वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ ही संबंधित मंत्रालयों की ओर से न सिर्फ मंजूरी दे दी गई, वरन बजट भी मुहैया करा दिया गया है।
आईसीएफआरई के महानिदेशक एवं वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत के मुताबिक जबसे कोरोना संक्रमण फैला है तब से वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध पर इसका असर पड़ा है। संस्थान के वैज्ञानिक कोरोना संकट के चलते दूसरे राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं जिसकी वजह से कई महत्वपूर्ण शोध अटके पड़े हैं।
कमोवेश यही बात वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉक्टर कालाचांद साईं ने भी दोहराई। ऐसे में संस्थान के वैज्ञानिक पूर्व में इकट्ठा किए गए वैज्ञानिक डाटा का विश्लेषण कर रहे हैं। बहरहाल जब स्थितियां सामान्य होंगी तभी वैज्ञानिकों द्वारा शोध को आगे बढ़ाया जाएगा।
उधर, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक धनंजय मोहन का भी कहना है कि कोरोना संक्रमण का सीधा असर तमाम वैज्ञानिक शोधों पर पड़ा है। संस्थान के वैज्ञानिकों की टीमें शोध के लिए नहीं जा पा रही है। फिलहाल जब स्थितियां सामान्य होंगी तभी तमाम शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।