पुलिस के कोविड कंट्रोल रूम से राहत देने वाली खबर आई है। यहां पहले की अपेक्षा कुछ दिनों में कॉल में 40 फीसदी से भी अधिक की कमी आई है। पहले अधिकतर कॉल सहायता मांगने के लिए (ऑक्सीजन, दवाएं, राशन आदि) के लिए आते थीं। लेकिन, अब ज्यादातर कॉल केवल जानकारी के लिए आते हैं।
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दरअसल, कोविड के बढ़ते प्रकोप के बाद अप्रैल की शुरूआत में एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ने पुलिस लाइन में कोविड कंट्रोल रूम स्थापित किया था। इस कंट्रोल रूम का इंचार्ज इंस्पेक्टर प्रदीप बिष्ट को बनाया गया था। शुरूआत में यहां पर विभिन्न तरह की जानकारी लेने के लिए कॉल आते थे। इन कॉल को पुलिस विभिन्न थानों को ट्रांसफर कर लोगों की सहायता करती थी।
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लेकिन, इसके बाद जैसे-जैसे महामारी ने विकराल रूप धारण किया तो कंट्रोल रूम की घंटियां भी डराने लगीं। खुद इंचार्ज प्रदीप बिष्ट बताते हैं कि लोगों की मजबूरी से भरी आवाज से दिल बैठ जाता था। किसी को ऑक्सीजन की जरूरत थी तो किसी को समय पर दवाएं नहीं मिल रहीं थीं। पुलिस चारों और दौड़ रही थी। कुछ फोन ऐसे आए जब पड़ोसियों ने पड़ोस के मकान में शव पड़े होने की जानकारियां भी दीं।
पीक टाइम में इन कॉल की संख्या 100 से अधिक हो गई थी। इनमें ज्यादातर में सबको जीवन रक्षक सामग्री चाहिए थी। लेकिन, बीते सप्ताह भर से थोड़ी राहत है। अब कॉल की संख्या 55 से 60 के बीच रह गई है। इनमें भी एक बात राहत वाली है कि ये कॉल मदद के लिए नहीं बल्कि अधिकतर लोग विभिन्न प्रकार की जानकारियां चाह रहे हैं। इन्हें पुलिस लगातार उपलब्ध करा रही है।
लोग दे रहे पुलिस के मिशन हौसला को धन्यवाद
लोग इन दिनों पुलिस के मिशन हौसला को धन्यवाद दे रहे हैं। दरअसल, पिछले दिनों जब डीजीपी ने इसकी शुरूआत की तो कंट्रोल रूम और चंद मोबाइल नंबरों से इसकी शुरूआत हुई। लेकिन, इसके बाद हर थाना क्षेत्रों में इसके पोस्टर लगवाए गए। इनमें थानाध्यक्ष और अन्य अधिकारियों के नंबर भी लिखे हुए थे। ऐसे में लोग सीधे इन नंबरों पर भी फोन कर सहायता मांग रहे हैं।