हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि बोर्ड की शेष बची हुई परीक्षा शुरू होने से पहले सभी परीक्षा केंद्रों (स्कूल बिल्डिंग, चेयर-डेस्क, टॉयलेट, वाटर फिल्टर आदि) को पूरी तरह से सैनिटाइज कराएं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली, हरिद्वार निवासी सच्चिदानंद डबराल और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार बोर्ड के बचे हुए पेपर 23 जून से 25 जून तक कराने जा रही है। जिन केंद्रों में परीक्षाएं कराईं जा रहीं हैं उन केंद्रों को सरकार ने क्वारंटनी सेंटर बनाया हुआ है। इन सेंटरों को पूरी तरह से सैनिटाइज तक नहीं किया गया है। ऐसे में छात्रों में वायरस के फैलने का खतरा है। याचिकाकर्ताओं ने प्रस्तावित परीक्षाएं रद्द करने की मांग की थी।
अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने हाईकोर्ट में पूर्व में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोरोना वायरस से बचने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार मेडिकल कर्मियों की सुरक्षा को लेकर उदासीन है। जो उपकरण मेडिकल कर्मियों को दिए गए हैं वे मानकों के अनुरूप नहीं हैं। उनकी गुणवत्ता निम्न है। वही, हरिद्वार निवासी सच्चिदानन्द डबराल ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रवासियों को उत्तराखंड में वापस ला रही है, लेकिन उनकी जांच बॉर्डर पर नहीं की जा रही है और ना ही बॉर्डर पर उनके खाने-पीने और रहने की ही उचित व्यवस्था की गई है।
उतराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शेष रह गईं परीक्षाएं 22 जून से शुरू हो रही हैं। लेकिन इस बार परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले पहुंचना होगा।
उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा परिषद की सचिव डॉ.नीता तिवारी के मुताबिक परीक्षा शुरू होने से पहले सभी छात्र-छात्राओं की थर्मल स्कैनिंग होगी, इसके अलावा सैनिटाइजेशन भी किया जाएगा। यही वजह है कि छात्र-छात्राओं को परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले बुलाया गया है। बोर्ड की सचिव के मुताबिक यदि किसी छात्र का तापमान सामान्य से अधिक पाया जाता है।
तो संबंधित की परीक्षा के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की जाएगी। वहीं यदि किसी कर्मचारी का तापमान सामान्य से अधिक मिला तो संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त कर ड्यूटी में अन्य कर्मचारी की व्यवस्था करनी होगी। परिषद की सचिव ने कहा कि प्रदेश में जहां कहीं भी कंटेनमेंट जोन बने हैं, वहां परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। सचिव की ओर से इसके अलावा कुछ अन्य निर्देश भी जारी किए गए हैं।