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उत्तराखंड: कर्मचारी परिषद ने चेताया, लॉकडाउन नहीं लगाया तो काम पर नहीं आएगा कोई भी कर्मचारी

Sun, 09 May 2021 11:50 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

बैठक में इस बात पर रोष जताया गया कि एक तरफ देहरादून में प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों में गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए स्थान नहीं मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के कार्यालयों में कर्मचारियों को उपस्थिति रहने के लिये बाध्य किए  जाने के कारण उनके संक्रमित होने की पूर्ण आशंका है।
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लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मांग की है कि सरकार कम से कम 15 दिन तक सभी दफ्तर पूरी तरह से बंद कर दे। परिषद की बैठक में रविवार को यह निर्णय लिया गया। ऑनलाइन बैठक में परिषद द्वारा कम से कम 15 दिन तक के लिए कार्यालय बंद करने की मांग की गई। बैठक में कहा गया कि देश-विदेश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी कम से कम 15 दिन के लॉकडाउन की सलाह दी है।

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बैठक में इस बात पर रोष जताया गया कि एक तरफ देहरादून में प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों में गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए स्थान नहीं मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के कार्यालयों में कर्मचारियों को उपस्थिति रहने के लिये बाध्य किए  जाने के कारण उनके संक्रमित होने की पूर्ण आशंका है। ऐसी स्थिति को संभालना प्रदेश सरकार के लिए असंभव हो जाएगा। प्रतिदिन मृतकों की संख्या में वृद्धि होती रहेगी।

किंतु राज्य सरकार के अधिकारी इन सब से आंख मूंदकर अनावश्यक रूप से कार्यालय खोलकर कोविड-19 के संक्रमण को बढ़ावा देने में अपना योगदान कर रहे हैं। बैठक में इस बात पर भी रोष व्यक्त किया गया कि गोल्डन कार्ड का कोई भी लाभ प्रदेश के कार्मिकों व पेंशन धारकों को प्राप्त नहीं हो रहा है। यहां तक की वह अस्पताल भी इलाज करने से मना कर दे रहे हैं, जिन की सूची राज्य स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा जारी की गई है। 
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ऐसी स्थिति में मांग की गई कि या तो गोल्डन कार्ड की व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए अन्यथा की स्थिति में माह अप्रैल के वेतन से गोल्डन कार्ड की कटौती बंद कर दी जाए। बैठक में यह भी मांग की गई कि राज्य के उन कार्मिकों को 50 लाख के बीमे का कवर प्रदान किया जाए, जोकि आवश्यक सेवा के अंतर्गत अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। क्योंकि वर्तमान में तमाम सारे विभागों में आवश्यक सेवा के कारण कार्मिकों को अपनी सेवा पर उपस्थित होकर कार्य करना पड़ रहा है। उनमें से बड़ी संख्या में कार्मिक संक्रमित होकर उससे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे कार्मिकों को कोविड-19 के संबंध में समस्त आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं, जिससे कि न सिर्फ वह संक्रमित होने से बच सकें बल्कि अपने परिवार को भी उनके द्वारा होने वाले संक्रमण से बचा सके। 

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बैठक में राज्य कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 का टीका लगाए जाने की भी मांग की गई, जिससे कि भविष्य में यदि किसी प्रकार की संक्रमण की संभावना बनती है तो कार्मिक नि:संकोच होकर अपनी सेवा कर सकें। बैठक में मुख्यमंत्री को यह सुझाव दिया गया की प्रत्येक जनपद स्तर पर ऑक्सीजन बैंक की स्थापना की जाए एवं जनपद मंडल व प्रदेश स्तर पर कर्मचारी नेताओं के साथ-साथ अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों के समूह बनाए जाएं। जोकि इस बात की देखरेख करें कि सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों का परिपालन जमीनी स्तर पर पूर्ण रूप से किया जा रहा है या नहीं। साथ ही यह भी मांग की गई कि मुख्यमंत्री एवं जनपदों हेतु नियुक्त प्रभारी मंत्रियों के साथ ही शासन के अधिकारी चिकित्सालयों का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविकता का संज्ञान लें। आवश्यकतानुसार सुधार की व्यवस्था करा सकें।

 बैठक में यह मांग की गई कि वर्तमान में प्रतिदिन कोविड-19 ते हुए संक्रमण के दृष्टिगत सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स व देश व विदेश के सम्मानित स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कोविड-19 की चेन को ब्रेक करने के लिए कम से कम 15 दिन तक समस्त कार्यालय बंद रखे जाए। बैठक में ठाकुर प्रह्लाद सिंह, पीके शर्मा ,अरुण पांडे, एसपी भट्ट, कुंवर सामंत, हर्ष मोहन सिंह नेगी, बहादुर सिंह बिष्ट, मोहन जोशी, गिरजेश कांडपाल, तनवीर अहमद, बाबू खान, बरखूराम मौर्या, जगमोहन नेगी, गुड्डी मटूड़ा, आरपी जोशी, सोवन सिंह रावत, डॉ. विनीता सिंह, एसएस अधिकारी, हरीश नौटियाल ,चमन अस्वाल ,रविंद्र कुमार आदि शामिल हुए।

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