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उत्तराखंड: मई महीने में अब तक करीब 335 हेक्टेयर जंगल हुआ खाक, सामने आई वनाग्नि की 209 घटनाएं

Sun, 09 May 2021 11:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

वन विभाग की ओर से जारी फायर बुलेटिन के मुताबिक रविवार को शाम चार बजे तक प्रदेश के जंगलों में आग का एक भी मामला सामने नहीं आया। लेकिन इससे पहले मई का पहला हफ्ता ही वन विभाग पर भारी गुजरा है।
 
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उत्तराखंड के जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में मई माह में वनाग्नि के मामले में पहली बार वन विभाग को राहत की सांस लेने का मौका मिला है। मई माह में अब तक करीब 335 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। वन विभाग की ओर से जारी फायर बुलेटिन के मुताबिक रविवार को शाम चार बजे तक प्रदेश के जंगलों में आग का एक भी मामला सामने नहीं आया। लेकिन इससे पहले मई का पहला हफ्ता ही वन विभाग पर भारी गुजरा है।

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बुलेटिन के मुताबिक मई माह में अब तक वनाग्नि की 209 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसमें करीब 335 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है और करीब सात लाख रुपये की वन संपदा का नुकसान हुआ है। आरक्षित वन क्षेत्र में आग के मामले ज्यादा सामने आए हैं और करीब 171 आरक्षित वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वन पंचायतों का करीब 164 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है। 

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बारिश होने के कारण यह रविवार को एक भी वनाग्नि का मामला सामने नहीं आया। अधिकारियों की माने तो मई माह में आग के ज्यादा मामले सामने आते हैं। इस बार अक्तूबर माह से ही जंगलों में आग लगनी शुरू हो गई थी। अप्रैल माह में जंगल की आग के मामले सामने आए। अप्रैल माह में करीब 1800 वनाग्नि के मामले सामने आए थे और करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ था। प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी के मुताबिक वन विभाग की ओर से जागरूकता पर भी फोकस किया जा रहा है। जानबूझकर आग लगाने के मामलों में मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और लोगों से भी सचेत रहने को कहा जा रहा है।
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सालभर रहेगा फायर सीजन
उत्तराखंड में अब फायर सीजन पूरे साल रहेगा। मतलब यह कि जंगलों की आग बुझाने के लिए सालभर फायर सीजन जैसी तैयारी और चौकसी रहेगी। अभी तक प्रदेश में 15 फरवरी से फायर सीजन शुरू होता था और 15 जून तक जारी रहता था।

प्रदेश में जंगल की आग की घटनाएं अधिकतर मानसून से पहले ही देखने को मिलती हैं। मानसून में बारिश के कारण चीड़ के जंगलों तक में आग के मामले सामने नहीं आते और सर्दियों में भी आग की घटनाएं कम हो जाती हैं। इसी के आधार पर जंगल की आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन मानता है। लेकिन इस बार सर्दी के सीजन में भी जंगल की आग के मामले सामने आए थे।

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