सिविल अस्पताल में रात को किसी को यह अंदाजा नहीं था कि सुबह तक ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं आएंगे। ऐसे में अस्पताल प्रबंधक ने बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं कर रखी थी। सुबह जब आखिरी सिलिंडर मरीजों के लिए लगाया गया तो स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए। यहां भर्ती मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी हुई तो स्टाफ ने कुछ ऐसे मरीजों की ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी, जिनका ऑक्सीजन लेवल ज्यादा कम नहीं था। ऐसे में उन मरीजों को कुछ देर दिक्कत हुई। ऑक्सीजन आते ही सबकी सप्लाई शुरू कर दी गई।
तीमारदारों पर ही भड़क उठा स्टाफ
सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदार शहजाद, विकास कुमार, महेश आदि का कहना है कि ऑक्सीजन खत्म होने की आशंका के दौरान उन्होंने अपने मरीजों के बारे में अस्पताल के स्टाफ से जानकारी लेनी चाही। आरोप है कि स्टाफ के सदस्यों ने कोई सकारात्मक जानकारी देने के बजाय उन पर ही भड़क गए। उन्होंने अपने मरीज को देखने की बात कही तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इन लोगों का कहना है कि उन्हें मालूम है कि कोरोना संक्रमित के पास जाना ठीक नहीं है, लेकिन उन्हें मरीज को दूर से देखने की अनुमति मिलनी ही चाहिए।
मंगलवार रात करीब दस बजे ऑक्सीजन लेने के लिए खाली सिलिंडरों को भेल हरिद्वार भेज दिया गया था। भीड़ अधिक होने के कारण ऑक्सीजन सिलिंडरों के पहुंचने में कुछ देरी हुई। हालांकि, इस दौरान मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। किसी मरीज के तीमारदार के साथ स्टाफ की बदसलूकी की जानकारी नहीं है। तीमारदारों को सुरक्षा की दृष्टि से संक्रमितों के पास नहीं भेजा जा रहा है।
-डॉ. संजय कंसल, सीएमएस, सिविल अस्पताल, रुड़की