केयर मेडिकल सेंटर अस्पताल पंडितवाड़ी के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि फेफड़ों में संक्रमण होने की वजह से फेफड़े प्राकृतिक ऑक्सीजन कम ले पाते हैं। इससे दिमाग में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती। दिमाग फेफड़ों को इस बात का सिग्नल देता है कि ऑक्सीजन की कमी हो रही है। इसलिए इंसान जोर-जोर से सांस लेने की कोशिश करता है। इससे दम फूलने लगता है।
ऐसी स्थिति में मरीज को कृत्रिम ऑक्सीजन मशीनों के जरिए दी जाती है। साथ ही कोरोना और निमोनिया की वजह से बढ़े संक्रमण को सिटी स्कैन के माध्यम से 25 हिस्सों में बांटकर उपचार दिया जाता है। जहां-जहां संक्रमण ज्यादा होगा, उसे दवाइयों से कम किया जाता है। डॉ. परवेज के मुताबिक ऑक्सीजन की कमी होने के कारण खांसी, बुखार, बदन दर्द, फ्लू, थकावट लगना, भूख न लगना सिर चकराना, सिर दर्द, घबराहट, दम फूलना आदि लक्षण होने लगते हैं।
सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत पहुंचे अस्पताल
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बावजूद अगर मरीज को ज्यादा दिक्कत नहीं है तो होम आइसोलेशन में रह सकते हैं। इस दौरान भी डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार और बचाव के साधनों का इस्तेमाल करते रहें। साथ ही पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर भी समय-समय पर नापते रहें, लेकिन अगर सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो तत्काल अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को दिखाएं।