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उत्तराखंड में कोरोना: शरीर में ऑक्सीजन की कमी से उखड़ रहीं करीब 70 फीसदी मरीजों की सांसें

Tue, 20 Apr 2021 01:47 PM IST
अलका त्यागी मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • डॉक्टरों के अनुसार, 70 प्रतिशत मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन की कमी पाई जा रही है। ऐसे में सांस संबंधी दिक्कतों के कारण ज्यादातर संक्रमित मरीजों की मौत हो रही है। 
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शव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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उत्तराखंड में कोरोना से संक्रमित ज्यादातर मरीजों की सांसें शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण उखड़ रही हैं। कोरोना से ग्रसित मरीजों के मरने वालों की मेडिकल केस हिस्ट्री देखें तो इससे भी स्पष्ट होता है कि अधिकतर मरीज सांस संबंधी दिक्कत से मौत का शिकार हो रहे हैं।

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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फिजीशियन डॉ. कुमार जी. कॉल ने बताया कि अस्पताल आने वाले 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में सांस संबंधी दिक्कतें होती हैं। संक्रमण के कारण मरीजों में प्राकृतिक ऑक्सीजन की कमी पाई जा रही है।

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जिसे कृत्रिम ऑक्सीजन देकर चेक करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद संक्रमण बढ़ने के कारण कई मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त नहीं बन पा रही है। फेफड़ों में कोरोना संक्रमण और निमोनिया होने की वजह से मरीज प्राकृतिक ऑक्सीजन के साथ ही मशीनों से भी ठीक से सांस नहीं ले पा रहे हैं।

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शरीर में होना चाहिए 95 से 100 प्रतिशत ऑक्सीजन का स्तर 
एमकेपी रोड स्थित आरोग्य धाम हेल्थ सिटी के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विपुल कंडवाल ने बताया कि फेफड़ों के ठीक से काम नहीं करने के कारण दिमाग को समुचित ऑक्सीजन नहीं मिलती है तो हृदय, किडनी समेत शरीर के विभिन्न अंग शिथिल पड़ने लगते हैं। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा 90 से अधिक होनी चाहिए। वैसे स्वस्थ शरीर में 95 से 100 प्रतिशत ऑक्सीजन होना चाहिए।

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दिमाग देता है फेफड़ों को ज्यादा ऑक्सीजन लेने का सिग्नल 

केयर मेडिकल सेंटर अस्पताल पंडितवाड़ी के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि फेफड़ों में संक्रमण होने की वजह से फेफड़े प्राकृतिक ऑक्सीजन कम ले पाते हैं। इससे दिमाग में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती। दिमाग फेफड़ों को इस बात का सिग्नल देता है कि ऑक्सीजन की कमी हो रही है। इसलिए इंसान जोर-जोर से सांस लेने की कोशिश करता है। इससे दम फूलने लगता है।

ऐसी स्थिति में मरीज को कृत्रिम ऑक्सीजन मशीनों के जरिए दी जाती है। साथ ही कोरोना और निमोनिया की वजह से बढ़े संक्रमण को सिटी स्कैन के माध्यम से 25 हिस्सों में बांटकर उपचार दिया जाता है। जहां-जहां संक्रमण ज्यादा होगा, उसे दवाइयों से कम किया जाता है। डॉ. परवेज के मुताबिक ऑक्सीजन की कमी होने के कारण खांसी, बुखार, बदन दर्द, फ्लू, थकावट लगना, भूख न लगना सिर चकराना, सिर दर्द, घबराहट, दम फूलना आदि लक्षण होने लगते हैं।

सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत पहुंचे अस्पताल
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बावजूद अगर मरीज को ज्यादा दिक्कत नहीं है तो होम आइसोलेशन में रह सकते हैं। इस दौरान भी डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार और बचाव के साधनों का इस्तेमाल करते रहें। साथ ही पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर भी समय-समय पर नापते रहें, लेकिन अगर सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो तत्काल अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को दिखाएं।
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