प्रवासियों के लौटने के साथ ही सरकार पर दोहरा दबाव है। पहला दबाव तो बुनियादी ढांचे के विकास का ही है। क्वारंटीन सेंटरों से लेकर उपचार आदि की व्यवस्था उन क्षेत्रों में करनी होगी, जहां अभी तक इनका अभाव है। दूसरा, रोजगार उपलब्ध कराने का भी दबाव होगा। नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना आदि ठंडे बस्ते में हैं। मनरेगा का ही सरकार को अधिक सहारा है।
कहां कितने लौटे
अल्मोड़ा 17747
बागेश्वर 1723
चमोली 1418
चंपावत 1746
देहरादून 2142
हरिद्वार 1090
नैनीताल 3286
पौड़ी 12270
पिथौरागढ़ 1845
रुद्रप्रयाग 1088
टिहरी 3618
यूएस नगर 1625
उत्तरकाशी 379
गांवों की ओर प्रवासी लौट रहे हैं। प्रदेश सरकार का साफ आदेश है कि बाहर गांवों में आने वालों को सात दिन तक क्वारंटीन सेंटर में रहना होगा। पंचायतों को इसका आदेश जारी किया जा चुका है और क्वांरटीन सेंटर सहित अन्य सुविधाओं के लिए पैसा भी जारी किया जा चुका है। जिला पंचायत राज अधिकारियों के साथ ही ग्राम प्रधानों से भी लगातार फीडबैक देने को कहा गया है।
-हरि चंद्र सेमवाल, सचिव पंचायतीराज और नोडल अधिकारी