उत्तराखंड सरकार ने जानलेवा कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर उत्तराखंड एपिडेमिक डिजीज कोविड-19 रेग्युलेशन एक्ट 2020 को लागू कर दिया है। शासन ने एक्ट की अधिसूचना जारी कर दी है। प्राइवेट लैबों में जांच के लिए कोरोना वायरस के सैंपल लेने को प्रतिबंधित किया गया है। सरकार की ओर से चयनित अस्पतालों व प्रयोगशालाओं में ही सैंपल लिए जाएंगे।
शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य स्तर पर सचिव स्वास्थ्य, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और जिले स्तर पर जिलाधिकारी या सचिव स्वास्थ्य की ओर से नामित अधिकारी को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अधिकार दिए गए हैं। अधिनियम में व्यवस्था की गई कि सभी सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अलग से वार्ड बनाया जाएगा। संदिग्ध मरीज की जांच के समय मरीज की यात्रा की जानकारी के साथ ही वायरस से प्रभावित व्यक्ति संपर्क में आया या नहीं इसका भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे 14 दिन तक घर में रखा जाएगा। वायरस से पीड़ित पाए जाने पर अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा। एक्ट में यह भी व्यवस्था की गई कि किसी क्षेत्र में कोरोना वायरस फैलने की स्थिति से निपटने के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी। टास्क फोर्स की अनुमति से बचाव कार्य किए जाएंगे।
- कोरोना वायरस फैलने की स्थिति में क्षेत्र विशेष को सील किया जा सकता है।
- प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश निषेध करने के साथ ही वहां से बाहर आने पर रोक लगाई जा सकती है।
- स्कूल व कार्यालय जहां लोग एकत्रित होते हैं, उन्हें बंद किया जा सकता है।
- वाहनों के संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।
- कोरोना वायरस के मामलों के सघन जांच का सर्वे।
- संदिग्ध मरीजों को आईसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा।
- सरकारी भवन को मरीजों को रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।