कोरोना वायरस के चलते चीनी नागरिकों और वाया चीन आने वाले दूसरे देशों के नागरिकों के वीजा रद करने के फैसले ने स्थानीय व्यापारियों की पेशानी पर बल ला दिए हैं। व्यापारियों को आशंका है कि चीन में इस महामारी पर जल्द लगाम नहीं लगी तो भारत सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा को इस बार रद करने का फैसला ले सकती हैं। हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी ही होगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को रद किए जाने की आशंका के पीछे व्यापारी जो वजह बता रहे हैं वह कुछ हद तक दुरुस्त भी नजर आ रही है। दरअसल, यात्रा को लेकर अभी तक विदेश मंत्रालय ने कोई तिथि घोषित नहीं की है। साथ ही यात्रियों से ऑनलाइन आवेदन भी नहीं लिए जा रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष तक 16 जनवरी के बाद ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। इस संबंध में कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक अशोक जोशी का कहना है कि अभी मानसरोवर यात्रा को लेकर बैठक की कोई तिथि नहीं आई है।
उधर, मानसरोवर यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी संशय में हैं। आईटीबीपी सूत्रों के अनुसार पिछली बार तक 28 जनवरी से पांच फरवरी तक यात्रा के सफल संचालन को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो जाता था। विदेश मंत्रालय में बैठक के बाद पहले आधार शिविर धारचूला में बैठक होती थी। अभी तक कैलाश यात्रा के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को कोई जानकारी नहीं है। सूत्रों के अनुसार गुंजी से लिपुपास करीब 36 किमी तक मार्ग बर्फ से लकदक हैं। आईटीबीपी पिछले वर्षों तक इस सीजन में बर्फ हटा कर यात्रा मार्ग दुरुस्त करने में जुट जाती थी लेकिन अभी कोई तैयारी नहीं है।
गुजरात के पंच कैलाश परिवार के सदस्य कमलेश पटेल ने बताया कि पिछली बार तक यात्रा के लिए 16 जनवरी से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार यह अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। यात्रा के संबंध में जानकारी लेने के लिए वह खुद तीन दिन दिल्ली में डेरा डाले रहे। पिछले वर्ष 18 दलों के 923 यात्रियों ने कैलाश यात्रा की। इनमें से सर्वाधिक 137 यात्री गुजरात के थे।