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कोरोना वायरस: योगा प्रशिक्षण के लिए पहुंचे 70 विदेशी पर्यटकों की जांच, केवल सीएमओ ही देंगे बयान

Fri, 06 Mar 2020 08:52 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/ रुद्रप्रयाग

सार

  • कोरोना वायरस को लेकर 70 विदेशी पर्यटकों की जांच
  • स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की निगरानी में हैं पर्यटक
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड में योगा प्रशिक्षण के लिए रुद्रप्रयाग पहुंचे विदेशी पर्यटकों के 70 सदस्यीय दल की स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। किसी भी पर्यटक में कोरोना वायरस नहीं मिला है। विभाग की ओर से पर्यटकों की नियमित निगरानी की जा रही है और दोबारा इनकी जांच भी की जाएगी।

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कुछ दिन पूर्व जापान, आस्ट्रेलिया और अन्य देशों से 70 पर्यटक जिले में पहुंचे थे। ये भारत में 22 फरवरी को आए थे और 15 मार्च तक उत्तराखंड में रहेंगे। ये सभी लोग जिला मुख्यालय से दूर बदरीनाथ हाईवे स्थित एक होटल में ठहरे हैं।

सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम होटल पहुंची। डा. गोपाल सजवाण और डा. प्रदीप ने कोरोना वायरस को लेकर पर्यटकों के स्वास्थ्य की जांच की। इस दौरान सभी पर्यटक, स्वस्थ और वायरस से मुक्त मिले। सीएमओ डा. एसके झा ने बताया कि किसी भी पर्यटक में कोरोना वायरस नहीं मिला है। ये लोग जिले में हैं, इसलिए चिकित्सकीय टीम इनकी नियमित निगरानी करेगी।

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कोरोना को लेकर देहरादून के सीएमओ ही देंगे बयान

देहरादून में कोरोना संक्रमण की स्थिति के बारे में किसी तरह का बयान देने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ही अधिकृत होंगी। पिछले दिनों एक डॉक्टर का पत्र वायरल होने से फैली दहशत के बाद जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

उल्लेखनीय है कि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. हीरालाल की ओर से चार मार्च को प्रिंसिपल को एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने मैक्स अस्पताल में कुछ मरीजों में कोरोना सकारात्मक पाए जाने का जिक्र किया था। साथ ही इसे देखते हुए उन्होंने बचाव के लिए मास्क, कैप और किट आदि उपलब्ध कराने की डिमांड भेजी थी।
 
इस पत्र के वायरल होते ही अस्पताल, कॉलेज से लेकर शासन-प्रशासन तक में हड़कंप मच गया। जबकि लोगों में दून में कोरोना की दस्तक की अफवाह से दहशत फैल गई। इस पर कॉलेज के प्रिंसिपल से लेकर स्वास्थ्य विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी। अधिकारियों ने कहा था कि पत्र लिखने वाले डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिसमें उन्होंने भूलवश ऐसा करने की बात कही।
 
इस पूरे प्रकरण से हुई फजीहत के बाद जिलाधिकारी ने जिले में सीएमओ के अलावा किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को कोरोना संक्रमण की स्थिति के बारे में बयान न देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने भी इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक, सभी विभागाध्यक्षों और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

कोरोना के संदिग्ध मरीजों के लिए एम्स में बना आइसोलेशन वार्ड

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में कोरोना वायरस आशंकित मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था और विभिन्न काउंटरों पर इंफ्रारेड थर्मामीटर, कोरोना संक्रमित रोगियों व उनके तीमारदारों के लिए मास्क की व्यवस्था कर दी गई है। एम्स प्रशासन ने देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के मद्देनजर एडवाइजरी जारी कर जन सामान्य को इससे जागरुक रहने का सुझाव दिया है। 

एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि नोवेल कोरोना वायरस एक संक्रमित लार्वा है, जो मनुष्यों को एवं पशुओं को दोनों को संक्रमित करता है। संस्थान की ओर से एडवाइजरी जारी कर आमजनों को कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव को लेकर जागरुक रहने की अपील की गई है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इस विषय में पूर्व में ही हाई अलर्ट जारी किया गया है।
 
डॉ. पीके पंडा ने बताया कि बुखार व सांस की तकलीफ होने पर ऐसे रोगियों की अस्पताल में जांच  कराना आवश्यक है। बुखार, खांसी व बेचैनी होने पर हमें अनावश्यक रूप से यात्रा नहीं करनी चाहिए व एहतियात बरतना चाहिए। एम्स संस्थान ने जारी एडवाइजरी में कहा है कि संस्थान कोरोना के 19 लक्षण की पहचान के लिए कुछ पहलुओं की जांच कर इसकी रोकथाम कर सकता है। ऐसे संदिग्ध रोगियों को अस्पताल लाते समय परिजनों को सर्जिकल मास्क पहनना आवश्यक है। संस्थान ने ऐसे रोगियों के लिए अलग से पंजीकरण केंद्र एवं उसके बाद विशेष उपचार कक्ष आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया।

आईसोलेशन वार्ड और अन्य व्यवस्थाएं बनाने पर दिया जोर 

कोरोना संक्रमण की आशंका के मद्देनजर जिले के सबसे बड़े अस्पताल में पर्याप्त आईसोलेशन वार्ड और अन्य व्यवस्थाएं बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत शुक्रवार को हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. हेमचंद ने दून अस्पताल का निरीक्षण किया।

कुलपति ने कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए जनरल वार्ड और ट्रॉमा सेंटर के समीप अलग-अलग बनाए गए आईसोलेनशन वार्डों का निरीक्षण किया। कुलपति ने वार्डों की स्थिति पर संतोष जताया।
 
साथ ही आईसीयू और आईसोलेशन वार्ड में तैनात स्टाफ के पर्सनल प्रोटेक्शन एक्जमाइन (पीपीई) किट, मास्क, गलब्स आदि व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी मांगी। अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि इसकी समुचित व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भी इसकी अतिरिक्त व्यवस्था के लिए टेंडर डाले जा रहे हैं। 
 
इस अवसर पर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री, एपीआरओ संदीप राणा, दिनेश रावत, वरिष्ठ फार्मासिस्ट सुधा कुकरेती, मैटर्न रामेश्वरी नेगी, अंजना नौक आदि शामिल रहे।
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नैनीताल में इटली के पर्यटकों की स्वास्थ्य जांच

देश में कोरोना वायरस का खौफ लगातार बढ़ रहा है। इटली के दो सैलानियों के नगर के होटल में ठहरने की सूचना मिलने पर पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया। बीडी पांडेअस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने निजी होटल में ठहरे दोनों सैलानियों के स्वास्थ्य की जांच की। दोनों में कोरोना संक्रमण न मिलने पर डॉक्टरों और प्रशासन ने राहत की सांस ली।

कोतवाली पुलिस को पता चला कि नगर के मल्लीताल क्षेत्र स्थित होटल में बृहस्पतिवार को इटली के दो सैलानी (महिला और पुरुष) ठहरे हैं। कोरोना वायरस को लेकर अलर्ट के चलते कोतवाली पुलिस ने बीडी पांडे अस्पताल के डॉक्टरों को सूचना दी। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एमएस दुग्ताल और डॉ. अभिनव गंगोला के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम होटल में पहुंची।

डॉक्टरों की टीम ने सैलानी फेड्रिको, ब्रोट्ज से पूछताछ की तो पता चला कि दोनों 13 फरवरी को इटली से रवाना होकर मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे, जहां एयरपोर्ट में ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया था। पर डॉक्टरों की टीम ने दोनों सैलानियों का होटल में भी स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉ. दुग्ताल ने बताया कि दोनों सैलानियों में कोरोना संक्रमण नहीं मिला। इधर कोतवाल अशोक कुमार सिंह का कहना है कि विदेशी सैलानियों के पहुंचने की सूचना मिलने के बाद एहतियातन उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ मिले हैं।

सोशल मीडिया में मॉक ड्रिल की फोटो वायरल कर अफवाह फैलाई गई कि अस्पताल में कोराना संक्रमित मरीज भर्ती हुआ है। पर कोरोना से ग्रसित किसी मरीज के अस्पताल में भर्ती होने जैसा मामला नहीं है। भविष्य में ऐसी हरकत करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. केएस धामी, पीएमएस, बीडी पांडे अस्पताल
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