शवों की अंत्येष्टि कोविड प्रोटोकाल से एंबुलेंस में आए लोग ही करते हैं। शव कहां से आए हैं, कोई रिकॉर्ड नहीं है। खड़खड़ी श्मशान घाट के कार्यालय मंत्री रामपाल के मुताबिक, कोविड शव की अंत्येष्टि के लिए अलग से स्थान तय कर दिया है। बीते सप्ताह में कोविड शव नहीं पहुंचा है, लेकिन प्रतिदिन अंत्येष्टि की संख्या बढ़ी है। 97 दाह संस्कार हुए हैं।
मात्र छह मरे तो आठ शव कहां से आए
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में एक अप्रैल से अब तक छह लोगों की कोविड से मौत हुई है। इनमें दो महिलाएं और चार पुरुष हैं। सभी की उम्र 50 साल से अधिक है, लेकिन कनखल श्मशान घाट पर एक सप्ताह में आठ शवों का कोविड प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार हुआ है।
ज्वालापुर के फातावाली में हरिद्वार का सबसे बड़ा कब्रिस्तान है। कोविड से इंतकाल वाला कोई शव फिलहाल यहां नहीं आया है। लेकिन, एहतियातन कब्रिस्तान में कोविड से मरने वाले लोगों के शवों को सुपुर्द-एक-खाक करने के लिए अलग जगह निर्धारित कर दी गई है। कब्रिस्तान के सेवादारों को भी एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।
-इमरान, सेवादार, फातावाली कब्रिस्तान
श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमितों के शवों की अंत्येष्टि के लिए अलग जगह निर्धारित है। वहां बोर्ड भी लगा दिया है। एक सप्ताह में कोविड के आठ शव आए हैं। शुक्रवार को तीन, बृहस्पतिवार को दो और बुधवार को एक शव आया था। शवों का दाह संस्कार एंबुलेंस में आने वाले कर्मी और मृतक के परिजन पीपीई किट पहनकर कर रहे हैं।
-हरिओम, कमेटी सदस्य, श्मशान घाट कनखल